किरीट भाई ठक्कर , गरियाबंद। जिला चिकित्सालय महासमुंद में पदस्थ सर्जन डॉ नरेंद्र नरसिंग द्वारा लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल छुरा एवं देवेंद्र नगर रायपुर स्थित उनके निजी नानक हॉस्पिटल में गलत तरीके से ईलाज के दौरान एक आदिवासी महिला गेन्दू बाई की मौत का मामला सुर्खियों में है।
मामला रफा दफा करने की अफवाहों और कोशिशों पर मीडिया ने पानी फेर दिया है। एक अखबार में प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेते हुये, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी गरियाबंद द्वारा छुरा स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
संचालक लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल छुरा को जारी पांच बिंदुओं के नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा गया है। जवाब संतोषप्रद नही पाये जाने पर एक तरफा कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
सीएचएमओ गरियाबंद द्वारा गठित जांच टीम की प्रारंभिक जांच में अस्पताल की लापरवाही सामने आई है। जिसके बाद जारी नोटिस के अनुसार मरीज की प्रारम्भिक जांच में मेंस्ट्रुअल हिस्ट्री / ऑब्स्ट्रेटिक हिस्ट्री अपूर्ण है। दूसरे बिंदु के अनुसार मरीज का यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट और ना ही पी.वी.एक्जामिनेशन किया गया और ना ही आपकी टीम द्वारा गाइनोकोलॉजी ओपिनियन लिया गया ?
मरीज की उम्र 35 वर्ष थी, जिसकी बच्चे दानी निकालने के लिये शल्य चिकित्सा हेतु आपके द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति से अप्रूवल नही लिया गया अथवा जिला चिकित्सालय से द्वितीय अभिमत प्राप्त नही किया गया। मरीज के ऑपरेशन हेतु दिये गये सहमति पत्र में मरीज का हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान क्यों नहीं लिया गया ? ऑपरेशन के बाद आपके अस्पताल में सर्जन द्वारा मरीज को एक बार भी क्यों नही देखा गया।

ईधर इस मामले में अस्पताल संचालक ज्योति नारायण दुबे का कहना है कि, 11अप्रैल को मरीज की भर्ती के बाद ऑपरेशन डॉ नरेंद्र नरसिंग द्वारा किया गया। 20 अप्रैल डिस्चार्ज कर दिया गया। एक सप्ताह बाद जब महिला को, फॉलो अप के लिये उसके परिजन लेकर आये, तब उसे डॉ नरेंद्र को ही दिखाने भेजा गया,आगे नानक नर्सिंग होम देवेंद्र नगर रायपुर में ईलाज शुरू हुआ,और स्थिति वही बिगड़ी। एक जानकारी के अनुसार इस बीच में महिला को जिला अस्पताल भी ले जाया गया था।
अस्पताल संचालक के अनुसार रुपये के लेन देन को लेकर भ्रामक प्रचार किया गया है। 11 अप्रैल फोन पे के माध्यम से 4 लाख नही सिर्फ 4 हजार रुपये लिये गये। 4500 रु का भुगतान सीटी स्कैन के लिये राजिम में किया गया, हमें नही ,12 अप्रैल फोन से 20 हजार रुपये का जो भुगतान हमें किया गया था,आयुष्यमान कार्ड जमा होने के बाद उसे वापस कर दिया गया। बाकी अस्पताल काउंटर में नगद रकम जमा करने की बात झूठी है। महिला के परिजनों के मुताबिक उसे 8 अप्रैल को छुरा स्थित अस्पताल में भर्ती किया गया था।




