* मातृ-पितृ पूजन दिवस भारतीय संस्कृति की आत्मा है – शिव वर्मा…
* ➡️ कहा – पाश्चात्य प्रभाव के स्थान पर भारतीय संस्कार अपनाने का संदेश देता यह पर्व…
राजनांदगांव : नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद शिव वर्मा ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन दिवस जो प्रत्येक वर्ष 14 फरवरी को मनाया जाता है भारतीय संस्कृति में माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और निस्वार्थ प्रेम को अभिव्यक्त करने का एक अनुपम पर्व है। यह दिवस आधुनिकता और पश्चिमी प्रभावों के बीच भारतीय पारिवारिक मूल्यों को सहेजने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
श्री वर्मा ने कहा कि आज के समय में जब युवा वर्ग पाश्चात्य संस्कृति और वैलेंटाइन डे जैसे आयोजनों की ओर अधिक आकर्षित हो रहा है, ऐसे में मातृ-पितृ पूजन दिवस भारतीय परंपराओं की याद दिलाता है। यह पर्व बच्चों को यह सिखाता है कि माता-पिता केवल जन्मदाता ही नहीं, बल्कि जीवन के पहले गुरु, मार्गदर्शक और सबसे बड़े शुभचिंतक होते हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिवस के माध्यम से बच्चों में माता-पिता के प्रति श्रद्धा, सेवा भाव और कृतज्ञता की भावना विकसित होती है। जब बच्चे अपने माता-पिता का पूजन करते हैं उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं तो इससे पारिवारिक रिश्तों में मधुरता और आत्मीयता बढ़ती है। यह परंपरा बच्चों को नैतिक मूल्यों और अनुशासन की ओर प्रेरित करती है।
श्री वर्मा के अनुसार मातृ-पितृ पूजन दिवस केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का पर्व भी है। इससे परिवारों के बीच संवाद बढ़ता है और पीढ़ियों के बीच की दूरी कम होती है। माता-पिता और बच्चों के रिश्ते मजबूत होने से समाज में भी सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।
उन्होंने बताया कि मातृ-पितृ पूजन दिवस को मनाने की प्रेरणा संत आशारामजी बापू से मिली है। उनके विचारों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करना और युवाओं को नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना रहा है।
अंत में शिव वर्मा ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन दिवस भारतीय संस्कृति की आत्मा को प्रतिबिंबित करता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी परंपराओं, संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को संजोकर रखना ही एक सशक्त और संतुलित समाज की नींव है।




