संस्कारधानी में गूंजा हर-हर महादेव, सातवीं बार निकली भव्य महाकाल यात्रा

*➡️ भोले की भक्ति में डूबी संस्कारधानी, धूमधाम से निकली महाकाल यात्रा…
* भक्ति और उत्साह का संगम: महाकाल यात्रा में उमड़ा जनसैलाब…
* शिव-पार्वती विवाह झांकी ने बांधा समां, शहर बना शिवधाम…
* उज्जैन की तर्ज पर राजनांदगांव में सजे महाकाल के दरबार…
राजनांदगांव(संतोष देवांगन) : छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी के रूप में पहचान रखने वाले राजनांदगांव में रविवार को भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर में सातवें वर्ष भव्य महाकाल यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
यात्रा की शुरुआत गुरुनानक चौक से हुई और यह शहर के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए जयस्तंभ चौक में संपन्न हुई।

ढोल-नगाड़ों, डीजे और धुमाल की गूंज के बीच निकली इस यात्रा में भूत, पिशाच और अघोरी स्वरूप धारण किए कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुति दी। भक्तजन भी भक्ति गीतों की धुन पर नृत्य करते नजर आए। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा और शहर शिवमय हो उठा।

महाकाल यात्रा आयोजन समिति के प्रमुख निखिल द्विवेदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष महाकाल यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष मध्यप्रदेश, हरियाणा और उड़ीसा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यात्रा को और भी विशेष बना दिया।

शाम 7 बजे मानव मंदिर चौक में भव्य मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भगवान शिव-पार्वती विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। हरियाणा की प्रीमियम आर्ट टीम ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।

निखिल द्विवेदी ने अपनी व्यक्तिगत आस्था साझा करते हुए बताया कि उनके साथ हुए वर्ष 2013 में नक्सली हमले के बाद से वे प्रत्येक माह महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन जाकर बाबा महाकाल के दर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि महाकाल की कृपा से वे कई बार संकटों से उबर पाए हैं। उनका उद्देश्य है कि उज्जैन की तर्ज पर राजनांदगांव में भी महाकाल यात्रा को भव्य स्वरूप दिया जाए। महाकाल यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनांदगांव में सभी धर्मों और परंपराओं के प्रति समान सम्मान और सहभागिता की भावना आज भी जीवंत है।

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