गरियाबंद । नगर पालिका परिषद गरियाबंद द्वारा गौरव पथ और शुक्रवारी बाजार में प्रस्तावित व्यवसायिक परिसरों के निर्माण और दुकानों की आम नीलामी को स्थगित कर दिया गया हैं।
नगर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान औचित्यहीन निर्माणों और नगर पालिका परिषद की कार्यशैली से त्रस्त जनता ने गौरव पथ और शुक्रवारी बाजार में प्रस्तावित व्यवसायिक परिसर में दुकानों के निर्माण का पुरजोर विरोध किया।

नगर की जनता को आशंका रही कि प्रस्तावित व्यवसायिक परिसर में दुकानों के निर्माण के बाद गौरवपथ में आवागमन में बाधा उत्पन्न होगी और दूसरी तरफ इस निर्माण से गांधी मैदान का रकबा घटाये जाने की भी संभावना थी।
नगर के प्रबुद्ध नागरिक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत मानिकपुरी व पूर्व पार्षद परस देवांगन ने ये कहकर इस प्रस्तावित योजना व नीलामी का लिखित विरोध किया कि, इसके लिये प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नही की गई थी, भु- आंबटन और प्रशासनिक स्वीकृति भी नहीं ली गई थी।
नागरिकों का कहना है कि पालिका प्रशासन द्वारा प्रस्तावित योजना का स्थगन अपरिहार्य कारणों से किया जाना बताया जा रहा है, किन्तु इसके कारणों को नगर पालिका अधिकारी को स्पष्ट करना होगा। बताना होगा कि भु – आंबटन और प्रशासकीय स्वीकृति के बगैर आखिर क्यों दुकानों की आम नीलामी अधिकतम प्रीमियम राशि के लिये की गई ? तकरीबन डेढ़ सौ लोगो से प्रीमियम की करोड़ो रूपये की राशि कहाँ और किसके पास किस आधार पर जमा की गई ?
नगर पालिका परिषद गरियाबंद द्वारा नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 109 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका अचल संपत्ति अंतरण नियम 1996 का हवाला देते हुये दिनाँक 16 फरवरी, 18 फरवरी साथ ही 20 फरवरी को दुकानों की नीलामी की सूचना का प्रकाशन किया गया था। इनमें से पहली दो तारीखों पर नीलामी की गई, जब विरोध बढ़ने लगा और मामला कलेक्टर तक पहुंचा तब 20 फरवरी को नीलामी बोली सम्पन्न नही की गई और अपरिहार्य कारणों से स्थगन की सूचना प्रसारित कर दी गई।
बताया जा रहा है कि जिस गौरव पथ सड़क किनारे और गांधी मैदान खसरा नम्बर 893/1 में 48 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित किया जा रहा था, वो राजस्व रिकार्ड में शासकीय आबादी भूमि दर्ज है। जिसका भू-आंबटन प्राप्त करना अनिवार्य था,आंबटन प्राप्त किये बिना नगर पालिका को इसकी नीलामी का अधिकार नहीं था। गौरव पथ सड़क किनारे की भूमि पर हरियाली और डीएमएफ फण्ड से पौधरोपण में व्यय की राशि को लेकर भी चर्चा और सवाल उठ रहे हैं।
जानकर बताते हैं कि यदि भूमि किसी विशेष श्रेणी में दर्ज हो ..जैसे निस्तार, खेल मैदान, सड़क किनारा या सार्वजनिक उपयोग तो इसके लिये भूमि उपयोग परिवर्तन की भी आवश्यकता होती है। मिली जानकारी के अनुसार राजस्व रिकार्ड में गांधी मैदान और गौरव पथ सड़क किनारे की भूमि जहां 48 दुकानों का निर्माण होना था, उसे नजूल भूमि बताया जा रहा है, किन्तु ये सच है कि दशकों से इसका उपयोग खेल मैदान सार्वजनिक उपयोग और सड़क किनारा के रूप में हो रहा है।
ऐसी स्थिति में भूमि के उपयोग परिवर्तन के लिये राज्य शासन की विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। वैसे राजस्व अभिलेख उक्त भूमि की उपयोगिता दर्ज नही है। जिस पर स्थानीय नागरिकों द्वारा पहल किये जाने की संभावना है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब मुख्य नगर पालिका अधिकारी संध्या वर्मा की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। उच्च स्तर पर उनकी शिकायत और निलंबन की मांग की जा रही है।




