गरियाबंद : देवभोग अंतर्गत मूंगझर के दशहरे में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इस दशहरे में स्थानीय संस्कृति की झलक दिखती है। इस दशहरे में देवी देवताओं के मिलन का जो समागम बनता है। यह अपने आपमें अकल्पनीय है। उक्त बातें मूंगझर में दशहरा उत्सव को सम्बोधित करते हुए संसदीय सचिव इंद्रजीत शाह मंडावी ने कही। उन्होंने मूंगझर दशहरा की जमकर तारीफ की। संसदीय सचिव ने कहा कि जिस तरह इस दशहरे में जनसैलाब उमड़ा है.. उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि इस दशहरे के प्रति इस क्षेत्र के लोग कितना आस्था रखते है।
इंद्रजीत शाह मंडावी ने कार्यक्रम के लिए आदि शक्ति दुर्गाउत्सव समिति एवं दशहरा महोत्सव समिति की भी जमकर तारीफ की। संसदीय सचिव ने कहा कि ग्रामीणों ने उन्हें इस दशहरे में आमंत्रित किया। इसके लिए वे सदा ग्रामीणों के आभारी रहेंगे। कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष स्मृति ठाकुर ने भी सम्बोधित किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में तहसील साहू संघ देवभोग के अध्यक्ष अनिल कुमार साहू, ब्रह्मण समाज के अध्यक्ष खिलावन पात्र, भाजयुमो जिला अध्यक्ष डॉक्टर योगीराज माखन कश्यप, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अरुण मिश्रा,गाड़ा समाज के अध्यक्ष चंदर सिंग प्रधान, यादव समाज से जयमल यादव के साथ ही ग्राम प्रमुख महेश्वर सिंह कोमर्रा, संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कोमर्रा,अध्यक्ष रामेश्वर साहू, सलाहकर केसरीराम कश्यप, तिलक सिंग शांडिल्य, रामाधीन कश्यप, मुरारीलाल साहू, भोलेश्वर कश्यप, सुरेश कश्यप, गणपत कश्यप, दामोधर प्रधान, नमन प्रधान, भूदेवदास वैष्णव भी मुख्य रूप से मौज़ूद रहे।

इसीलिए इस दशहरे की होती है चर्चा
क्षेत्र में मूंगझर दशहरा बहुत ज्यादा चर्चित दशहरा है। इस दशहरे में पच्चीस ग्राम से पहुँचे देवी देवताओं का स्वागत सत्कार कर उन्हें गॉव में लाया जाता है। वहीं गॉव में पहुंचने के बाद देवी बाजे की धुन में सभी देवियों का नृत्य काफ़ी मनोरम होता है। देवियों के इस रूप का दर्शन करने के लिए आसपास के चालीस से पचास गॉव से करीब दस हजार से ज्यादा की संख्या में श्रद्धालुगण मूंगझर पहुँचकर देवी का आशीर्वाद लेते है। वहीं गॉव के प्रमुख महेश्वर सिंह कोमर्रा ने बताया कि प्राचीनकाल के समय से गॉव में मालगुज़ार परिवार का विशेष महत्व होता था। ऐसे में आज भी इस प्रचलन का पालन करते हुए ग्रामीण कोमर्रा परिवार को विशेष महत्व देते है।
ग्राम प्रमुख ने बताया कि मूंगझर का यह दशहरा गॉव की एकता का प्रतीक है। इस दशहरे से मानवता का अच्छा संदेश जाता है। वहीं दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष रामेश्वर साहू ने बताया कि कलाकारों को मंच देने के लिए यहां हर साल दशहरे के उपलक्ष्य में नाटक का आयोजन किया जाता है। गॉव में हर साल चार से पांच जगह पर नाटक प्रतियोगिता होता है। वहीं जो नाटक गॉव में अच्छा प्रस्तुति देता है। उसे समिति के लोग निर्णय लेकर उसके प्रस्तुति के आधार पर स्थान देकर पुरुस्कार भी देते है।




