उर्वरक “काला हीरा” विवाद गहराया, नकली बिक्री और राजपत्र उल्लंघन का आरोप ◉ किसान यूनियन ने हड़ताल की दी चेतावनी

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़

 

मोहला/राजनांदगांव _किसानों के बीच चर्चित उर्वरक “काला हीरा” को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय चंद्र कृषि केंद्र से खरीदे गए इस उर्वरक में गंभीर विसंगतियाँ पाई गईं, जिसके बाद अब मामला नकली उत्पाद, बिलिंग विरोधाभास और सरकारी राजपत्र के उल्लंघन तक पहुँच गया है।

बिल और उत्पाद में विरोधाभास
किसान शिवशंकर जी का कहना है कि उन्हें चंद्र कृषि केंद्र से जो बिल मिला, उस पर विक्रय लाइसेंस अंकित नहीं था। वहीं, पैकेट पर निर्माता फार्मर बायोक्राफ  लिखा हुआ था, लेकिन बॉक्स में AVK एग्रो लाइफ साइंस दर्ज था। टैक्स इनवॉइस भी आवक एग्रो लाइफ साइंस के नाम से जारी किया गया, जबकि पैकेट पर अंकित निर्माता अलग था। यह विसंगति उत्पाद की प्रामाणिकता पर सवाल खड़ा करती है।

राजपत्र उल्लंघन का आरोप
केंद्र सरकार के राजपत्र अनुसार 16 जून 2025 के बाद इस उत्पाद की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बावजूद 24 जुलाई 2025 को इनवॉइस नंबर 541 और ई-वे बिल नंबर 821557177270 पर “काला हीरा” की बिक्री की गई। किसानों का कहना है कि यह सीधे-सीधे राजपत्र की अवहेलना है और विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं।

 

शिकायतों पर विभाग मौन
30 जुलाई 2025 को उर्वरक निरीक्षक को शिकायत सौंपी गई, लेकिन वे अनुपस्थित रहे और कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 18 अगस्त 2025 को भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार अधिवक्ता महेंद्र कुमार साहू ने कलेक्टर एवं उप संचालक कृषि को भी शिकायत भेजी, वहीं 4 अगस्त को मामला कृषि मंत्रालय, नई दिल्ली और कृषि विभाग छत्तीसगढ़ तक पहुँचाया गया।

कंपनी का पक्ष
एपीके एग्रो लाइफ साइंस का कहना है कि “काला हीरा” संचनालय कृषि छत्तीसगढ़ शासन रायपुर (प्रमाणपत्र संख्या 143/2022) से पंजीकृत उत्पाद है और प्रतिबंध के बाद भी वैध है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि वे नकली उत्पादों के खिलाफ कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

किसानों का आंदोलन की तैयारी
मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ भारतीय किसान यूनियन की जिला इकाई मोहला-मानपुर ने हड़ताल की चेतावनी दी है। जिला अध्यक्ष कौशल देशमुख के नेतृत्व में यूनियन ने घोषणा की है कि जल्द ही कृषि विभाग मोहला के सामने अनिश्चितकालीन धरना-हड़ताल शुरू किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन कृषि विभाग की लापरवाही के कारण हो रहा है, इसलिए धरना-प्रदर्शन पर खर्च का भार भी विभाग का होगा।

किसान नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि हड़ताल के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना होती है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी कृषि विभाग प्रशासन की होगी।

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