धूल फांक रही है एक करोड़ से अधिक राशि की दुग्ध प्रसंस्करण इकाई

गरियाबंद। जनपद के ग्राम पंचायत चिखली में स्थापित दुग्ध पाश्चुरीकरण (मिल्क पेस्टयूराइजेशन) प्लांट निर्माण/स्थापना के बाद से ही वीरान पड़ा है, इसे रीपा योजना के तहत 1 करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि खर्च कर बनाया गया था।

गरियाबंद

योजना के उद्घाटन को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
रीपा (रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क एरिया) योजना 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा ग्रामीणों को स्थायी व उन्नत रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। मगर चिखली का यह प्लांट ‘रोजगार’ के बजाय ‘उजाड़’ का प्रतीक बन चुका है।

प्लांट की रखवाली कर रहे द्वारका और उनकी पत्नी बीते 11 महीनों से बिना एक रुपये मानदेय के डटे यहां हुये हैं। द्वारका कहते हैं—
“यहां बड़ी-बड़ी मशीनें रखी हैं, अगर मैं छोड़ दूं तो कुछ भी नहीं बचेगा।”
वेतन न मिलने के बावजूद वह जिम्मेदारी और उम्मीद के सहारे चौकीदारी कर रहे हैं, जबकि इस वजह से वे कहीं और काम भी नहीं कर पा रहे।

झूठे आंकड़ों पर टिकी योजना

सूत्र बताते हैं कि प्लांट की स्थापना के लिये शासन को फर्जी आंकड़े प्रस्तुत किये गये — दुधारू पशुओं की संख्या, पशुपालकों की सूची और दूध उत्पादन, सब कुछ कागज़ पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। परिणाम यह कि अब ना दूध है, ना खरीदार, और लाखों की मशीनें धूल खा रही हैं।

इस मामले में ग्राम पंचायत चिखली की सरपंच सरिता ध्रुव का कहना है कि करीब एक डेढ़ साल पहले इसके उद्घाटन की जानकारी मुझे है, तब जिला स्तर के बड़े अधिकारियों ने आकर इसका उद्घाटन किया था, उसके बाद से प्लांट संचालन के लिये कोई आगे नही आ रहा, कुछेक महिला समूहों को इसे संचालित करने कहा गया था, किन्तु बड़े स्तर का काम है, प्रतिदिन 6,000 लिटर दूध चाहिये, इसीलिये महिला समूह इसके लिये तैय्यार नही है। किसी अन्य व्यक्ति या संस्था ने इसके संचालन का टेंडर लिया हो, इसकी मुझे जानकारी नही है।

"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के लिए किरीट ठक्कर की रिपोर्ट
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किरीट ठक्कर "छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" संवाददाता
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