*Dr. Bijendra* का संपादकीय लेख ”कब बदलेंगी जातिगत भावनाएं “

CG 24 NEWS :- जहाँ एक ओर हम विज्ञान तकनीकी व अन्य कई क्षेत्र में विलक्षण पायदान हांसिल किये हैं वहीं दूसरी ओर कई जगहों पर हो रही भेदभाव पूर्ण व जातिगत हिंसा की घटनाएं अत्यंत चिन्ता जनक व विचारणीय है। वैज्ञानिक प्रगति व आधुनिकता के बाद भी जातिगत भेदभाव के चलते हत्या व अन्य अपराध से जाहिर है कि समाज में मानवीय संवेदना व जीवन मूल्य बेतहाशा ध्वस्त हुआ है। बीते दिनों एक दलित छात्र की पानी पीने के नाम पर पिटाई के दौरान मृत्यु का मामला सामने आया है। इससे पहले जातीय भेदभाव के चलते एक दलित युवक की हत्या की गयी थी।
आज भी अधिकतर लोगों के मन में कमोबेश जातिगत विद्वेष कायम है। शिक्षित व सभ्य समाज कहे जाने के बाद भी दूषित विचार कायमहै। यह एक मानसिक बीमारी है जिससे पीड़ित  लोग ऐसे जघन्य कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। मौजूदा परिवेश में भी जातिगत विद्वेष से प्रेरित हत्या आगजनी दुर्व्यवहार की घटनाएँ आम होती जा रही है। ऐसे मामले अधिकतर गरीब व निम्न मध्यवर्ग के साथ होते हैं। देश व राज्यों में विकास का सारा जोर भोतिक निर्माण पर हो रहा है । नैतिक मूल्यों व सामाजिक विकास नीतियों पर गौर करने की जरुरत नही समझी गयी। वैचारिक क्रान्ति व जीवन मूल्यों के विकास से ही बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है। जब तक कानून व्यवस्था के साथ साथ संकीर्ण सोच के लोगों के मनोविज्ञान को समझकर इनके सुधार का रास्ता नहीं निकाला जा सकता तब तक समाज में जातिगत हिंसा को खत्म करना मुश्किल होगा। कड़े कानून के बाद भी जातिगत भेदभाव के चलते अगर मासूमो को जान गंवानी पड़ रही है तो यह सोचने का समय है कि तमाम विकास की नीतियों व सामाजिक विकास के इतने लम्बे सफर में हमारी सफलता इतने दुखद क्यों है।
ऐसी अप्रिय व दुखद घटनाए संविधान वेत्ताओ की मूल भावनाओं के खिलाफ है। यह संवेदनहीनता व अमानवीयता का परिचायक है व मानवता को कलंकित करता है। विकास सिर्फ भौतिक ही नहीं बल्कि विकास जीवन मूल्यों का भी होना चाहिए। हमें उस मनःस्थिति से मुक्त होने की जरुरत है जो ऐसे जघन्य कृत्यों को अंजाम देने के लिए प्रेरित करती है । दलितों व पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वाले दलों को अपना राजनैतिक स्वार्थ छोड़ ठोस कदम उठाने चाहिए। ऐसी दुखद घटनाओं का चौतरफा पुरजोर विरोध किया जाना चाहिये। आधुनिकता सिर्फ जीवन शैली में ही नहीं बल्कि आधुनिकता विचारों मे भी होना चाहिए। इन समस्याओं से जूझने के लिए नैतिक आधार पर सामाजिक क्रान्ति लगानी होगी।
आपका सेवाभावी शुभचिंतक
डॉ. बिजेंद्र सिन्हा
निपानी.पाटन .दुर्ग।
Mo.8074963971
B. R. SAHU CO-EDITOR
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