Cg24News-R :- गणतंत्र दिवस हमें कर्तव्य का पालन करने व संविधान का सम्मान करने की प्रेरणा प्रदान करता है। स्वतंत्रता के इन वर्षों में हमने बहुत कुछ अर्जित किया है, हमारे देश में दुनिया में अपनी अलग पहचान भी बनाई है, लेकिन हम अब तक क्या हासिल नहीं कर पाये उस पर मनन भी होना चाहिए। राजनैतिक मतभेद लोकतंत्र में सहज है लेकिन राजनीति में मनभेद हमारी प्रगति में बाधक है। विकास का पैमाना सिर्फ भौतिक विकास को मानना , राजनैतिक टकराव सामाजिक सौहार्द्रता में आई कमी आदि चुनौतियां हमारी प्रगति की राह में बाधक है।राजनीति में मनभेद कई तरह की समस्याएं पैदा कर रहा है। इन समस्याओं का समाधान निकालने की जरुरत है। विकास का पैमाना सिर्फ भौतिक साधनों सुविधाओं तक सीमित न हो। विकास के साथ नैतिक मूल्यों का होना भी जरूरी है। जनहितैशी मुद्दों पर अनावश्यक खींच ताना से बचना चाहिए। मूल्यों व मुद्दों आधारित विकास होना चाहिए। विकास की सार्थकता तभी है जब उसमें मानवीय मूल्यों का स्थान हो। विकास के शांतिपूर्ण माहौल भी होना चाहिए ।प्रभुता वादी सोच भी कई समस्याओं का कारण है। समानता का सिद्धांत हमारे देश के संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अतः प्रभुता के बजाय समानता का भाव अपनाने की जरुरत है। यही लोकतंत्र का मूल है, गणतंत्र दिवस उत्सव के साथ चिंतन व मनन का मौका भी है। जो हासिल नहीं कर पाये उस पर मनन भी होना चाहिए, वर्तमान समय में देश के विकास में सभी जाति पंथ धर्म के लोगों किसानों व सभी वर्ग के लोगों का योगदान रहा है। संविधान भी वर्गभेद को अस्वीकारा है, हमारा देश धर्म निरपेक्षता के सिद्धांत की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने के लिए विश्व विख्यात है। धर्म सभी को एकता व समता के सूत्र में बाँधने का कार्य करती है। धर्म निरपेक्षता नैतिकता तथा मानव कल्याण को बढावा देते हैं। जो प्रायः सभी धर्मों का मूल है, सामाजिक व धार्मिक विभाजन को रोकने से देश का घरेलू पक्ष मजबूत होगा। देश को समावेशी विकास की ओर होने की जरुरत है। धर्म निरपेक्षता का प्रति पादन भारत को सार्वभौमिक श्रेय दिलाता है। हमारे संविधान में स्वतंत्रता समानता बन्धुत्व व न्याय आदि मूल्य निहित है। यही लोकतंत्र का मूल मन्त्र है। संविधान के अनुरूप व्यवस्था का संचालन हमारा महत्वपूर्ण कर्तव्य है। जिससे हमारा देश शांतिपूर्ण उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।



