पंजीकृत आयुष चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी डॉक्टर’ कहना कानूनी अपराध, होगी जेल व कानूनी कार्रवाई: डॉ. प्रिंस जायसवाल
राष्ट्रीय आयोग (NCISM) और छत्तीसगढ़ राज्य परिषद का बड़ा फैसला; प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों, CMHO और आयुष अधिकारियों को जारी हुआ सख्त परिपत्र
आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने फैसले का किया स्वागत, कहा— “पंजीकृत डॉक्टरों के सम्मान से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं”

रायपुर / बिलासपुर / सरगुजा:
छत्तीसगढ़ राज्य में अपनी सेवाएं दे रहे हजारों पंजीकृत एवं मान्यता प्राप्त आयुष (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध एवं सोवा-रिग्पा) चिकित्सकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यावसायिक सम्मान की रक्षा के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब विधिवत डिग्रियां प्राप्त और राज्य परिषद में पंजीकृत आयुष डॉक्टरों को सार्वजनिक रूप से, सोशल मीडिया पर या प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी डॉक्टर’ कहना भारी पड़ सकता है। ऐसा करने वालों के खिलाफ NCISM अधिनियम 2020 एवं संबंधित राज्य अधिनियमों के तहत सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयुष मेडिकल एसोसिएशन (छत्तीसगढ़ राज्य) के प्रदेश महासचिव डॉ. प्रिंस जायसवाल ने प्रेस को संबोधित करते हुए भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM), नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद, रायपुर द्वारा जारी आदेशों की विस्तृत जानकारी दी।
राष्ट्रीय आयोग (NCISM) का सख्त रुख और आदेश

डॉ. प्रिंस जायसवाल ने बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM), नई दिल्ली के बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कन्नौजिया द्वारा परिपत्र (Ref. No. 20-28/2022-Regn. (Misc) | दिनांक: 29/07/2026) जारी कर देशभर में पंजीकृत आयुष डॉक्टरों की कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई है।
आयोग ने अपने परिपत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आयोग के संज्ञान में यह गंभीर विषय आया है कि—
“बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS), बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS), बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी (BSMS) तथा बैचलर ऑफ सोवा-रिग्पा मेडिसिन एंड सर्जरी (BSRMS) जैसी मान्यता प्राप्त डिग्रियां प्राप्त, विधिवत प्रशिक्षित और पंजीकृत चिकित्सकों को सार्वजनिक सूचनाओं, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया मंचों व अन्य सार्वजनिक माध्यमों में ‘झोलाछाप’ अथवा ‘फर्जी डॉक्टर’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जा रहा है, जिससे उनकी सामाजिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुँच रही है।”
छत्तीसगढ़ शासन व राज्य परिषद का त्वरित अमल
राष्ट्रीय आयोग के दिशा-निर्देशों के तारतम्य में छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद, रायपुर के रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला ने राज्य स्तर पर आदेश क्रमांक /स्था./2026/915-1016 (दिनांक: 03/08/2026) जारी कर दिया है।
इस आदेश की प्रतिलिपि राज्य के:
- समस्त जिला कलेक्टरों
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO)
- समस्त जिला आयुष अधिकारियों
को भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अधीनस्थ कार्यालयों व विभागों को इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने हेतु निर्देशित करें।
क्या है आयुष डॉक्टरों की विधिक स्थिति? (Legal Status)
डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कानूनी प्रावधानों की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि:
- कानूनी मान्यता: भारतीय चिकित्सा राष्ट्रीय परिषद अधिनियम, 1970 (IMCC Act, 1970) तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग अधिनियम, 2020 (NCISM Act, 2020) के प्रावधानों के तहत संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों में पंजीकृत डॉक्टर पूरी तरह से विधिक (Legal) चिकित्सा व्यवसायी हैं।
- अधिकार व कर्तव्य: NCISM अधिनियम 2020 भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में शिक्षा, आचार-संहिता एवं व्यावसायिक अभ्यास के विनियमन हेतु एक मजबूत वैधानिक ढांचा प्रदान करता है। पंजीकृत डॉक्टर प्रचलित विधियों के अनुसार अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के निर्वहन के लिए पूर्ण रूप से अधिकृत हैं।
- अपमानजनक शब्दों का प्रयोग गैर-कानूनी: किसी भी व्यक्ति, संस्थान, मीडिया संगठन या शासकीय प्राधिकरण द्वारा ऐसे पंजीकृत डॉक्टरों के लिए “झोलाछाप” या “फर्जी” शब्दों का प्रयोग करना भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग अधिनियम 2020 तथा छत्तीसगढ़ अधिनियम 1970 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
प्रदेश महासचिव डॉ. प्रिंस जायसवाल का कड़ा वक्तव्य
आयुष मेडिकल एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा:
“छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक आयुष डॉक्टर स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम कर रहे हैं। महामारी हो या आम बीमारियां, BAMS और अन्य पंजीकृत डॉक्टर लगातार जनसेवा में समर्पित हैं। इसके बावजूद अज्ञानता या दुर्भावना के कारण कई बार उन्हें ‘झोलाछाप’ की श्रेणी में खड़ा करने का दुस्साहस किया जाता है, जो अत्यंत निंदनीय है।”
उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा:
“अब जब राष्ट्रीय आयोग और छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है, तो एसोसिएशन भी पूरी तरह से मुस्तैद है। यदि अब कोई भी व्यक्ति, असामाजिक तत्व या कोई संस्थान किसी पंजीकृत आयुष डॉक्टर के सम्मान से खिलवाड़ करेगा या भ्रामक खबरें फैलाएगा, तो आयुष मेडिकल एसोसिएशन उसके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने से लेकर न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा।”
मुख्य बिंदु
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विवरण |
प्रमुख तथ्य |
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संगठन / वक्ता |
डॉ. प्रिंस जायसवाल (प्रदेश महासचिव, आयुष मेडिकल एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ राज्य) |
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जारीकर्ता संस्थाएं |
1. NCISM (राष्ट्रीय आयोग, नई दिल्ली) 2. राज्य आयुष परिषद, रायपुर (छ.ग.) |
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आदेश की मुख्य बातें |
BAMS, BUMS, BSMS, BSRMS डॉक्टरों को ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी’ कहना गैर-कानूनी |
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अधिनियम का हवाला |
NCISM Act 2020 एवं IMCC Act 1970 के तहत दंडात्मक कार्यवाही योग्य |
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प्रशासनिक निर्देश |
राज्य के सभी कलेक्टरों व CMHO को आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश जारी |
निष्कर्ष
इस ऐतिहासिक निर्णय से प्रदेश के हजारों पंजीकृत आयुष चिकित्सकों में खुशी की लहर है। आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार, आयुष मंत्रालय, NCISM के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कन्नौजिया तथा राज्य परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला का आभार जताया है और उम्मीद जताई है कि इससे डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।





