
करतला थाना क्षेत्र में अवैध कबाड़ का धंधा इस कदर फल–फूल रहा है कि अब यह कानून को नहीं, सीधे पुलिस को चुनौती देता नजर आ रहा है। शक्ति जिले से आए कबाड़ व्यापारी बिना किसी वैध दस्तावेज के खुलेआम चोरी का सामान खरीद–फरोख्त कर रहे हैं, लेकिन न तो शासन–प्रशासन हरकत में है और न ही करतला पुलिस की नींद टूट रही है।
हैरानी की बात यह है कि कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के स्पष्ट और सख्त निर्देश हैं कि “मेरे रहते जिले में कोई भी अवैध गतिविधि नहीं चलेगी”, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन आदेशों की धज्जियां उड़ाती दिख रही है। सवाल उठता है—क्या ये आदेश सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित हैं?
सूत्र बताते हैं कि इन कबाड़ व्यापारियों के पास न लाइसेंस है, न रजिस्ट्रेशन और न ही माल के वैध काग़ज़। अधिकांश कबाड़ चोरी का होता है, जिसे खुलेआम खरीदा–बेचा जाता है। कुछ समय पहले इन्हीं कबाड़ियों को चोरी का माल खरीदते हुए पकड़ा गया था और जेल भी भेजा गया था, लेकिन सख़्ती का असर इतना कमजोर रहा कि आज फिर वही खेल पूरे आत्मविश्वास से जारी है।
यही कारण है कि क्षेत्र में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चोरों को पता है कि चोरी का माल आसानी से बिक जाएगा, क्योंकि खरीदार खुलेआम मौजूद हैं और कार्रवाई का डर न के बराबर।
सबसे बड़ा सवाल यह है—
आख़िर करतला पुलिस इन अवैध कबाड़ कारोबारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
क्या पुलिस की आंखें बंद हैं या फिर यह चुप्पी किसी गहरी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है?
अगर समय रहते इस अवैध नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में करतला क्षेत्र अपराध का गढ़ बन सकता है—और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी स्थानीय पुलिस और प्रशासन की होगी।




