रायपुर। शिक्षा का अधिकार कानून में 16 दिसंबर 2025 को किए गए बदलाव का खामियाजा यह हुआ कि इस वर्ष सिर्फ 19,495 सीटों पर ही गरीब बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश मिल पाएंगा, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल लगातार विरोध कर रहे है।
पॉल ने जनवरी में स्कूल शिक्षा सचिव को दो पत्र लिखकर शिक्षा का अधिकार कानून में किए गए गैर संवैधानिक बदलाव को निरस्त कर एक स्थायी आदेश जारी करने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नही दिया और इस शिक्षा सत्र 2026-27 में सिर्फ 19,495 सीटों पर ही गरीब बच्चों को प्रवेश गिए जाने की घोषणा आरटीई पोर्टल में कर दी है और प्रवेश आरंभ कर दिया।
पॉल का कहना है कि बीजेपी की सरकार अब गरीब बच्चों को मुफ्त में मंहगे प्रायवेट स्कूलों में शिक्षा नही देना चाहती है इसलिए मूल कानून में गैर संवैधानिक बदलाव किया गया है। पॉल ने पुनः स्कूल शिक्षा सचिव को एक पत्र जारी कर वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2025 तक आरटीई के अंतर्गत प्रायवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को दिए गए प्रवेश की वर्षवार संख्यात्मक जानकारी देेते बताया है कि, 13 वर्षो में इस वर्ष सबसे कम संख्या में गरीब बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिया जाएंगा और मांग की है कि, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई कानून में किए गए गैर संवैधानिक बदलाव को निरस्त किया जाए और आरटीई कानून के प्रावधान के अनुुरूप प्रवेश दिया जाए।
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आरटीई के अंतर्गत प्रायवेट स्कूलों में प्रवेशित बच्चों की जानकारीः-
वर्ष 2012-13 में कुल 25,084 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2013-14 में कुल 33,560 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2014-15 में कुल 44,117 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2015-16 में कुल 25,876 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2016-17 में कुल 37,933 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2017-18 में कुल 44,935 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2018-19 में कुल 40,254 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2019-20 में कुल 48,167 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2020-21 में कुल 52,680 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2021-22 में कुल 40,000 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2022-23 में कुल 56,679 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2023-24 में कुल 51,599 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2024-25 में कुल 50,117 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।
वर्ष 2025-26 में कुल 53,023 बच्चों को प्रवेश दिया गया था।




