बलूचिस्तान के खनिज पर अमेरिका की नजर, लेकिन विद्रोहियों ने बढ़ाई मुश्किल

पाकिस्तान से अमेरिका नहीं पहुंची रेयर-अर्थ मिनरल की खेप, बलूचिस्तान में हमलों से प्रोजेक्ट पर संकट
ट्रम्प का मिनरल प्रोजेक्ट अटका! बलूच हमलों से पाकिस्तान में काम ठप

बलूचिस्तान के खनिज पर अमेरिका की नजर, लेकिन विद्रोहियों ने बढ़ाई मुश्किल
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान से अमेरिका को भेजी जाने वाली दुर्लभ खनिजों की प्रस्तावित खेप अगस्त में रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद पाकिस्तान में अमेरिकी कंपनी US Strategic Metals (USSM) की गतिविधियों पर भी असर पड़ने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, बलूचिस्तान में सुरक्षा चुनौतियों के कारण कंपनी के लिए खनिज परियोजनाओं पर काम करना मुश्किल हो रहा है।

बलूचिस्तान के चागई जिले में रेको दिक खदान क्षेत्र तक पहुंचने वाले मार्गों पर बलूच विद्रोही संगठन BLA की गतिविधियों ने हालात को और जटिल बना दिया है। सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के चलते खनिजों की आपूर्ति और परियोजना से जुड़ा काम प्रभावित होने की बात सामने आई है।

ट्रम्प के सामने मुनीर ने दिखाए थे खनिजों के सैंपल
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सितंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान खनिजों के नमूने भी दिखाए थे। लकड़ी के बॉक्स में रखे अलग-अलग रंगों के मिनरल स्पेसिमेन को लेकर इस मुलाकात की काफी चर्चा हुई थी।

पाकिस्तान से अमेरिका भेजी गई पहली खेप में एंटीमनी, कॉपर कॉन्सन्ट्रेट, नियोडिमियम और प्रेजोडिमियम जैसे खनिज शामिल बताए गए थे। प्रस्तावित योजना के तहत शुरुआती चरण में खनिज निर्यात, इसके बाद पाकिस्तान में प्रोसेसिंग और आगे बड़े पैमाने पर खनन की योजना बनाई गई थी।

हाईटेक इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम हैं रेयर-अर्थ मिनरल?
रेयर-अर्थ तत्वों में 17 रासायनिक तत्वों का समूह शामिल होता है। इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक और कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है। इनके कुछ उपयोग रक्षा और हाई-टेक उपकरणों में भी होते हैं। यही वजह है कि इन खनिजों की आपूर्ति को लेकर अमेरिका और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

रेको दिक पर बैरिक गोल्ड के सामने भी सुरक्षा चुनौती
बलूचिस्तान की रेको दिक परियोजना में कनाडाई कंपनी Barrick Gold की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। क्षेत्र में जारी सुरक्षा चुनौतियों और विद्रोही गतिविधियों के कारण परियोजना के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बलूचिस्तान में खनिजों को लेकर बढ़ रही अमेरिका-चीन की दिलचस्पी
बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। वहीं ग्वादर पोर्ट चीन के बेल्ट एंड रोड और CPEC प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र में चीनी निवेश और गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी सामने आता रहा है।

स्थानीय मछुआरों की ओर से चीनी फिशिंग बोट्स के कारण पारंपरिक मछली पकड़ने के कारोबार पर असर पड़ने की शिकायतें भी की जाती रही हैं।

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है।

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