एमसीबी: महिला एवं बाल विकास विभाग में संविदा भर्तियों पर बढ़ा प्रशासनिक घमासान, पूर्व विधायक ने खोला मोर्चा

एमसीबी: महिला एवं बाल विकास विभाग में संविदा भर्तियों पर बढ़ा प्रशासनिक घमासान, पूर्व विधायक ने खोला मोर्चा

​तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यकाल की 5 बड़ी भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे गंभीर सवाल; 10 माह से अटकी जांच पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं कलेक्टर को प्रेषित किया कड़ा पुनः स्मरण पत्र

 (MCB)

​नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत बीते समय में संपन्न हुई विभिन्न संविदा एवं सेवा प्रदाता (Service Provider) भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और नियमों की अनदेखी का मामला एक बार फिर तूल पकड़ चुका है। इस बहुचर्चित मामले में शासन-प्रशासन स्तर पर लंबे समय से जारी कथित चुप्पी और शिथिलता को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर) तथा कलेक्टर (एमसीबी) को एक अति-महत्वपूर्ण पुनः स्मरण पत्र (Reminder Letter) प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर भर्ती नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रियाओं में धांधली की गई।

​10 माह बीतने के बाद भी फाइलें धूल फांक रहीं: प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े हुए तीखे सवाल

​पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने स्मरण पत्र में प्रशासन की मंशा पर सीधे सवाल खड़े करते हुए कहा है कि लगभग 10 माह पूर्व उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर एवं पत्राचार के माध्यम से इस पूरे प्रकरण में ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रासंगिक शिकायतों के साथ ज्ञापन सौंपा था।

​शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि किस प्रकार चयन समितियों द्वारा रोस्टर प्रणाली, पारदर्शिता और न्यूनतम शैक्षणिक-अनुभव संबंधी मानकों का उल्लंघन कर नियुक्तियां प्रदान की गईं। हालांकि, 10 महीने की एक लंबी समयावधि बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन या विभागीय स्तर पर न तो दोषियों को चिह्नित किया गया, न ही किसी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

​गुलाब कमरो का कहना है कि इतने गंभीर मामले में प्रशासनिक सुस्ती से यह संदेह बलवती होता है कि जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे योग्य और मेधावी स्थानीय युवाओं का भरोसा भर्ती तंत्र से उठता जा रहा है।

​इन 5 प्रमुख योजनाओं/निकायों की भर्तियों पर लटकी जांच की तलवार

​पूर्व विधायक ने पुनः स्मरण पत्र के जरिए विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की निम्नलिखित भर्ती प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से जांच के दायरे में लाने की मांग दोहराई है:

​1. मिशन वात्सल्य (जिला बाल संरक्षण इकाई, JJB एवं CWC)

​जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), किशोर न्याय बोर्ड (JJB) एवं बाल कल्याण समिति (CWC) के अंतर्गत विभिन्न संविदा पदों पर की गई नियुक्तियों में अनुभव प्रमाण-पत्रों और मेरिट अंकों की गणना में भारी हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।

​2. चाइल्ड हेल्पलाइन (राज्य एवं जिला स्तरीय भर्ती)

​मिशन वात्सल्य योजना के तहत पुनर्गठित Child Helpline के राज्य एवं जिला स्तरीय संविदा पदों पर हुई चयन प्रक्रिया में विज्ञापन के नियमों और मापदंडों को दरकिनार करने की शिकायत की गई है।

​3. मिशन शक्ति (महिला सशक्तिकरण केंद्र)

​जिला स्तरीय महिला सशक्तिकरण केंद्र (HUB) के सुचारू संचालन के लिए स्वीकृत संविदा पदों पर आउटसोर्सिंग व भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता न बरतने तथा पात्र आवेदकों को दरकिनार करने का आरोप है।

​4. महिला संरक्षण अधिकारी (Protection Officer)

​घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु महिला संरक्षण अधिकारी के संविदा पद पर की गई नियुक्ति में अभ्यर्थी की पात्रता और अनुभव की प्रमाणिकता की गहन जांच की मांग की गई है।

​5. सखी वन स्टॉप सेंटर (सेवा प्रदाता भर्तियां)

​संकटग्रस्त महिलाओं को आपातकालीन सहायता देने वाले ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ के संचालन हेतु विभिन्न सेवा प्रदाता (Service Provider) एजेंसियों एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों के चयन में वित्तीय एवं प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

​स्मरण पत्र के माध्यम से शासन-प्रशासन के समक्ष रखी गईं 3 प्रमुख मांगें

  • उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति का गठन: तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं भर्ती प्रक्रिया में शामिल तत्कालीन समिति सदस्यों की भूमिका की समीक्षा हेतु राज्य स्तर के अधिकारियों की एक निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए।
  • गड़बड़ी वाली संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया का निरस्तीकरण: जिन-जिन पदों पर अनियमितता के साक्ष्य पाए जाते हैं, उनकी पूरी चयन सूची को तत्काल निरस्त किया जाए और छत्तीसगढ़ शासन के पारदर्शी नियमों के तहत पुनः विज्ञापन जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मंगाए जाएं।
  • दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई: शासकीय पदों और अधिकारों का दुरुपयोग करने वाले तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ दंडात्मक कानूनी कदम उठाए जाएं।

​”युवाओं के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ी जाएगी” — गुलाब कमरो

“महिला एवं बाल विकास विभाग में हुई यह धांधली सीधे तौर पर जिले के पढ़े-लिखे, पात्र और मेहनती युवाओं के अधिकारों पर डाका है। 10 महीने का समय एक निष्पक्ष जांच पूरी करने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन प्रशासन का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है। यदि इस पुनः स्मरण पत्र के बाद भी शासन-प्रशासन चेता नहीं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पारदर्शी पुनर्भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो हमें बाध्य होकर युवाओं के न्याय के लिए उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।”

गुलाब कमरो, पूर्व विधायक (भरतपुर-सोनहत)

 

​अब आगे क्या?

​पूर्व विधायक के इस कड़े पुनः स्मरण पत्र के बाद जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य शासन इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी करता है या जिला स्तर पर ही जांच प्रक्रिया को गति दी जाती है।

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