स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: MCB जिले में एनालॉग पनीर के खिलाफ चला विशेष अभियान, 7 डेयरी और 2 होटलों पर छापा
खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई: 9 प्रतिष्ठानों की सघन जांच, विक्रेताओं से लिया गया ‘स्व-घोषणा पत्र’

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)
राज्य शासन एवं कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के सख्त निर्देशों पर जिले में मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिले भर में कृत्रिम यानी ‘एनालॉग पनीर’ (Analog Paneer) के अवैध भंडारण, विक्रय और उपयोग को रोकने के लिए एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया।
इस सघन जांच अभियान के दौरान टीम ने जिले के प्रमुख स्थलों पर स्थित 07 डेयरी प्रतिष्ठानों और 02 बड़े होटल/रेस्टोरेंट का औचक निरीक्षण किया।
बिल-वाउचर, लेबलिंग और मानकों की हुई बारीक जांच
कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने दुकानों और प्रतिष्ठानों में जाकर पनीर के भंडारण, क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेजों, बिल-वाउचर और लेबलिंग का बारीकी से परीक्षण किया। टीम ने इस बात की पुष्टि की कि बाजारों में असली डेयरी पनीर के नाम पर वेजिटेबल ऑयल या स्टार्च से बना एनालॉग पनीर तो नहीं बेचा जा रहा है।
इन 09 प्रमुख प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई:
निरीक्षण दल द्वारा शहर के निम्नलिखित 9 प्रतिष्ठानों की जांच की गई और उनसे एनालॉग पनीर का निर्माण, भंडारण, विक्रय अथवा उपयोग न करने का स्व-घोषणा पत्र (Self Declaration) भरवाया गया:
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- हनुमान डेयरी, जे.के.डी. रोड
- जय अम्बे डेयरी, जे.के.डी. रोड
- श्री राम डेयरी, साई तिराहा
- माँ शारदा डेयरी, नदी पारा
- मारुति डेयरी, नदी पारा
- जया डेयरी, बस स्टैंड
- यादव डेयरी, बस स्टैंड
- होटल हसदेव इन, मनेंद्रगढ़
- पैराडाइज रेस्टोरेंट, मनेंद्रगढ़
“राज्य शासन द्वारा एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, विक्रय और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई होगी।”
— सुश्री संतन देवी जांगड़े, कलेक्टर, जिला MCB
क्या होता है एनालॉग पनीर और क्यों है प्रतिबंध?
एनालॉग पनीर असली दूध से तैयार नहीं होता। इसे दूध के फैट को निकालकर सस्ती वनस्पति वसा (Vegetable Fat/Palm Oil), स्टार्च और रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। देखने में यह बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसका सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसी वजह से राज्य शासन ने इसके इस्तेमाल और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।
आगे भी जारी रहेगा जांच का चाबुक
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के औचक और विशेष निरीक्षण अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे। यदि किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या डेयरी में मिलावटी खाद्य पदार्थ या एनालॉग पनीर पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए दुकान सील करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।





