
बाराबंकी _अगर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का असली चेहरा देखना हो तो बाराबंकी के सिद्धौर धान क्रय केंद्र का रुख कीजिए। यहाँ कागजों में सब कुछ दुरुस्त है, लेकिन जमीन पर हालात इसके ठीक उलट। नियम, व्यवस्था और पारदर्शिता—तीनों ही केवल फाइलों तक सीमित नजर आ रहे हैं।
एडीएम की एंट्री और ‘गायब’ होती ट्रालियां
बुधवार को एडीएम अरुण कुमार सिंह और डिप्टी आरएमओ राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ निरीक्षण के लिए केंद्र पहुंचे। जैसे ही अधिकारियों का काफिला केंद्र के पास पहुंचा, गेट पर खड़ी किसानों की ट्रालियां रहस्यमय तरीके से हटवा दी गईं।
अंदर जांच चलती रही और बाहर किसान अपनी बारी के इंतजार में भटकते रहे। अधिकारियों के जाते ही वही ट्रालियां दोबारा गेट पर दिखाई दीं। इस पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी एसएमआई आलोक श्रीवास्तव के अधीन बताई जा रही है।
टोकन का खेल, किसान बेहाल
केंद्र पर दो कांटे लगे होने के बावजूद रोजाना 600 क्विंटल तौल का दावा किया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि किसान को टोकन थमाकर दो महीने बाद आने को कह दिया जाता है।
किसान असमंजस में है—धान बेचकर घर चलाए या महीनों तक रखवाली करता रहे। कई किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर धान व्यापारियों को बेच चुके हैं।
तौल में दिखावा, शाम होते ही ‘ठप’
अधिकारियों के सामने कुछ नामों की सूची जरूर दिखाई गई, जिससे सब कुछ सामान्य दर्शाया जा सके। लेकिन स्थानीय किसानों का आरोप है कि शाम 5 बजे के बाद कांटे बंद कर दिए जाते हैं।
वास्तविक तौल किसानों की नहीं, बल्कि व्यापारियों और बिचौलियों के धान की हो रही है, जो “वीआईपी एंट्री” के साथ केंद्र में पहुंच रहा है।
विधायक का आरोप: “सब मिले हुए हैं”
जैदपुर विधायक गौरव रावत ने मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थानीय अधिकारियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र है।
विधायक के अनुसार, किसान अपना धान पहले ही मजबूरी में बेच चुका है, अब जो तौल दिखाई जा रही है वह व्यापारियों के माल की है।
मुख्यमंत्री के आदेश भी बेअसर
इस प्रकरण में मुख्यमंत्री के निजी सचिव संजय प्रसाद द्वारा संज्ञान लेते हुए डीएम को जांच के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
किसानों का आरोप है कि आदेश आते हैं, लेकिन अमल नहीं होता।
सवाल सीधे-सीधे
क्या धान क्रय केंद्र किसानों के लिए हैं या बिचौलियों के लिए?
क्या निरीक्षण केवल फोटो और खानापूर्ति तक सीमित रहेंगे?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
फिलहाल सिद्धौर धान क्रय केंद्र भ्रष्टाचार का खुला प्रदर्शन बन चुका है। किसान परेशान है, व्यापारी लाभ में है और अधिकारी “सब ठीक है” का दावा कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाता है।




