किरीट भाई ठक्कर, गरियाबंद : जिले की सरकारी शराब दुकानों में ब्रांडेड शराब नही मिल रही है। मजबूरी में लोग निम्न स्तर की शराब खरीद रहे हैं। आम चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में शराब माफिया हावी है, जिनकी पहुंच उच्च स्तर तक है। जिस तरह प्रदेश में कोल माफ़िया पर केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की कार्यवाही में प्रदेश के बड़े बड़े नेताओं सहित उच्च आईएएस अधिकारियों, कुछ कथित बड़े व्यापारियों की संलिप्तता सामने आयी है,उसी तरह शराब की काला बाजारी में भी ऐसे ही लोगों की संबद्धता सामने आ सकती है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में केंद्रीय एजेंसी ईडी द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई के बाद से जिले की सरकारी मदिरा दुकानों में बेची जा रही निम्न स्तर की शराब की चर्चा भी आम हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिले के आबकारी विभाग ने भी माना है कि दुकानों में ब्रांडेड शराब उपलब्ध नहीं है। हालांकि विभागीय वरिष्ठ अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि एक सप्ताह के भीतर, लोगों को उनकी पसंद की शराब उपलब्ध होगी। इधर शराब प्रेमियों का कहना है कि अंग्रेजी मदिरा दुकानो से सभी तरह की ब्रांडेड शराब गायब है मजबूरन कुछ भी खरीदना पड़ रहा है , मजे की बात ये है कि इन अगड़म बगड़म ब्रांडों की शराब के दाम भी अधिक है।

राजस्व में कमी
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार देवभाग सीमा क्षेत्र के अधिकतर लोगों ने छत्तीसगढ़ राज्य की शराब दुकानों से शराब खरीदना लगभग बंद कर दिया है। इसकी बजाये वें ओडिशा की शराब को तरज़ीह दे रहे हैं। सीमा क्षेत्र होने की वजह से ओडिशा की शराब मिलना आसान भी है , एक जानकारी ये भी है कि कुछ लोग ओडिशा की शराब लाकर सीमा क्षेत्रों में बेच रहे हैं, इसे आप शराब की तस्करी भी कह सकते है। ये ऐसे कारण है जिनकी वजह से छत्तीसगढ़ राज्य की शराब की खपत कम हो सकती है। इससे राजस्व में कमी आने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
लोकप्रिय ब्रांड शराब दुकानों में नही है
विभागीय सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है उत्पादन प्रभावित होने से जिले में शराब की सप्लाई कम हुई है। खासतौर पर कई लोकप्रिय ब्रांड की शराब सरकारी दुकानों में उपलब्ध नहीं है। अंग्रेजी दुकानों में केवल सस्ती ( सम्भवतःअब गोवा भी नही है) ब्रांड शराब ही मिल रही है। ऐसे में मदिरा के शौकीन अपने शौक की खातिर ओडिशा तक पहुंच जाते हैं।
फिर भी चौकानें वाले आंकड़े
शराब की घटिया क्वालिटी होने के बाद भी जिले में संचालित 15 देशी और विदेशी मदिरा दुकान में मार्च में 51 प्रतिशत और अप्रैल माह में 77 प्रतिशत शराब की अधिक बिक्री हुई है। मार्च माह में 14 करोड़ तो अप्रैल माह में 12 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री हुई हैं। यही कारण है कि माफ़िया की नजर इस धंधे पर है।




