प्रदेश सहित मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र पाटन के अजा अजजा वर्गों के समाजिक जनों एवं अधिकारी-कर्मचारी ने कहां ‘पिंगुआ कमेटी के रिपोर्ट’ को लागू करने
आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व शासकीय सेवाओं में स्वीकृत में से आधे खाली हैं-सरकार बनाने योगदान देने के बदले संवैधानिक अधिकार छीने जा रहें। बता दें कि राज्य में लगभग आधी आबादी अजा व अजजा वर्गों के लोगों की है जो सरकार बनाने से लेकर बिगाड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। तथा अभी तक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण पश्चात जितने भी चुनाव हुए हैं उनमें सरकार बनाने में अजा एवं अजजा आरक्षित विधानसभा क्षेत्र ने निर्णायक भूमिका निभाई है।

सरकार द्वारा गठित पिंगुआ कमेटी ने बताया आरक्षित वर्गों का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व-
लेकिन सरकार के विभिन्न शासकीय विभागों व संस्थाओं में शासकीय अधिकारी-कर्मचारी के रूप में प्रतिनिधित्व स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग आधी खाली हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ द्वारा गठित पिंगुआ कमेटी के रिपोर्ट ने पुष्टि की है,जिसे केबिनेट ने स्वीकृति प्रदान करते हुए पदोन्नति में आरक्षण देने की जानकारी कानून मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्वयं ही थी।
हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर हैं-
बिलासपुर हाईकोर्ट में अजा अजजा वर्गों के शासकीय सेवाओं में प्रतिनिधित्व पर क्वांटिफाईबल डांटा के रूप में पिंगुआ कमेटी का रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की जानकारी मिली है। तथा सुनवाई जारी है। इस बीच रेगुलर पदोन्नति के अंतरिम आदेश पर समान्य प्रशासन विभाग ने विभिन्न विभागों को पदोन्नति करने आदेश जारी किया है।जिस पर पदोन्नति हाईकोर्ट के फैसले के अधीन रहेगा।

छत्तीसगढ़ में अब तक के सबसे अधिक पदोन्नति बिना आरक्षण के-
बिना आरक्षण रोस्टर का पालन किए धड़ल्ले से पदोन्नति किए जा रहे हैं, जिसमें अजा व अजजा वर्गों में से बहुत कम है। जिससे इन वर्गों का प्रतिनिधित्व की रिक्तियों की खाई और बढ़ते जा रहीं हैं।एक अनुमान के मुताबिक लगभग पचास हजार से अधिक पदों पर बिना आरक्षण के पदोन्नति जारी है। अकेले शिक्षा विभाग में ही जिनके विभागीय मंत्री स्वयं अजजा वर्ग से हैं उनके विभाग में ही थोक के भाव में लगभग तीस हजार से अधिक पदोन्नति से पदों को बिना आरक्षण रोस्टर के भरे जा रहे हैं। राज्य निर्माण के पश्चात अभी तक इतने पदोन्नति कभी नहीं हुई जितनी कि अभी बिना आरक्षण के कर रहे हैं।
बिना आरक्षण के पदोन्नति में रोल बैक-
पदोन्नति में आरक्षण पर हाईकोर्ट बिलासपुर में रिट याचिका 9778/2019 विष्णु प्रसाद तिवारी वर्सेज स्टेट आफ छत्तीसगढ़ एवं 91/2019 एस.संतोष कुमार वर्सेज स्टेट आफ छत्तीसगढ़ में सुनवाई लगभग अंतिम दौर में हैं , तथा सरकार ने अपने रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन अनुसार बेहतर कार्य किए हैं जिससे पदोन्नति में आरक्षण के पक्ष में फैसला आने की संभावना ज्यादा हैं। आखिर पदोन्नति में आरक्षण देना या नहीं देना यह राज्य सरकार का निर्णय बताया गया है, जिसमें राज्य में आरक्षित वर्गों के अर्याप्त प्रतिनिधत्व के आंकड़ों के आधार पर लागू करने सक्षम हैं। तथा कोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण आदेश जारी करने पर पुनः रोल बैक की स्थिति प्रदेश में बनेंगी जिसके तहत बिना आरक्षण रोस्टर के पदोन्नति प्राप्त करने वाले समान्य वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों जो आरक्षित पदों के बदले भी भरे जा रहे हैं वे वापस होंगे। इससे एक छत व टेबल के नीचे काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी में खटास पैदा होगा।

आरक्षण रोस्टर का पालन करते पदोन्नति की मांग-
इन सभी दृष्टियों को ध्यान में रखते हुए आरक्षित वर्ग के तमाम समाजिक संगठनों ने तथा विपक्षी राजनैतिक दलों के साथ ही साथ अधिकारी-कर्मचारयों ने तत्काल बिना आरक्षण रोस्टर के पदोन्नति पर रोक लगाते हुए आरक्षण सहित पदोन्नति देने की मांग किए हैं।तथा ऐसा नहीं होने पर व्यापक जन विरोध के आयोजन हेतु मजबूत होने की बातें कही जा रही हैं।
तहसील सतनामी समाज पाटन ने भी सौंपा पदोन्नति में आरक्षण मांगपत्र-
इस परिप्रेक्ष्य में काफी समय से तहसील सतनामी समाज पाटन ने भी अपने विभिन्न आयोजनों व तहसील स्तरीय गुरू घासीदास जयंती समारोहों व मुख्यमंत्री से मुलाकात पर मांगपत्र के माध्यम से भी पदोन्नति में आरक्षण लागू करने समाज की भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराते रहें हैं।अब आगे देखना यह होगा कि सरकार स्वयं द्वारा केबिनेट में पारित पिंगुआ कमेटी के रिपोर्ट अनुसार पदोन्नति में आरक्षण देते हुए पदोन्नति करते हैं कि रिक्तियों की लगभग 50% की खाई को और बड़ा करते हैं।




