ड्रोन फेल होने के बावजूद साहसिक रेस्क्यू, घायल तेंदुए की जान बची
गरियाबंद । जिले के तौरेंगा बफर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोकड़ी में शिकारियों के फंदे में फंसे एक गंभीर रूप से घायल तेंदुए को उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व की एंटी-पोचिंग टीम ने समय रहते रेस्क्यू कर उसकी जान बचा ली।

घनी झाड़ियों में छिपे होने के कारण ड्रोन की उपयोगिता सीमित हो गई, ऐसे में नोडल एंटी-पोचिंग अधिकारी एवं सहायक संचालक एसडीओ गोपाल कश्यप ने जान की परवाह किये बिना अकेले रस्सी का जाल, तेंदुए पर फेंककर उसे काबू में किया। रेस्क्यू के दौरान तेंदुए ने उन पर हमला भी किया, लेकिन ग्रामीणों और वन बल की मदद से तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में बंद कर लिया गया।
जांच में सामने आया कि तेंदुए के गले में दो क्लच वायर फंदे फंसे हुए थे, जो लगभग 7 दिनों से उसकी गर्दन में कस रहे थे। गंभीर चोट और दम घुटने की स्थिति के कारण तेंदुआ आबादी क्षेत्र में आसान शिकार की तलाश में भटक रहा था, जिससे ग्रामीणों और बच्चों पर हमले का खतरा बना हुआ था।
सूचना मिलने पर जंगल सफारी रायपुर से डॉक्टर जय किशोर जडिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रात में ही तेंदुए को बेहोश कर दोनों फंदे निकाले गए और मौके पर इलाज किया गया। तेंदुए को तड़के सुबह 4 बजे जंगल सफारी अस्पताल लाया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। स्वस्थ होने के बाद तेंदुए को फिर से उदंती के जंगलों में छोड़ा जायेगा।
इस मामले में वन्यप्राणी अपराध (POR) दर्ज कर लिया गया है। फंदे लगाने वाले शिकारियों की तलाश के लिये डॉग स्क्वाड, स्पाई कैमरे और गोपनीय सूचना तंत्र का सहारा लिया जा रहा है।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई फंदे लगाने वाले शिकारियों की सूचना देता है, तो उसे 5 हजार से 10 हजार रुपये तक का गोपनीय पुरस्कार दिया जायेगा। इसके लिये डीएफओ वरुण जैन का मोबाइल नंबर 7568127875 जारी किया गया है।
वन विभाग के अनुसार, सीमित स्टाफ और संसाधनों के बावजूद टाइगर रिज़र्व की टीम एक्शन मोड में है। बीते 7 दिनों में 19 शिकारी गिरफ्तार किये गये हैं, जबकि पिछले 3 वर्षों में 750 हेक्टेयर अतिक्रमण भूमि मुक्त कराई गई है और 500 से अधिक शिकारी व तस्कर पकड़े जा चुके हैं।




