राजनांदगांव के धर्मापुर आश्रम को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता सामने आई है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने आश्रम से रेस्क्यू किए गए नाबालिग बच्चों की शिक्षा बाधित न होने देने की मांग की है।
धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों को लेकर बीते एक सप्ताह से राजनांदगांव जिले में माहौल गर्माया हुआ है।
नेहरू नगर निवासी डेविड चाको द्वारा धर्मापुर में विदेशी फंडिंग से बनाए गए चर्च और आश्रम को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
आरोप है कि इस आश्रम में कांकेर जिले से लाए गए लगभग एक दर्जन नाबालिग आदिवासी बच्चों को बीते तीन वर्षों से गैरकानूनी रूप से रखा गया था।
जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बच्चों को रेस्क्यू कर सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) को सौंपा, जिसके बाद उन्हें उनके माता-पिता को वापस सौंप दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब बच्चों की पढ़ाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
पॉल का कहना है कि ये बच्चे धर्मापुर और आसपास के गांवों के स्कूलों में अध्ययनरत थे, लेकिन अब उन्हें वापस कांकेर भेज दिए जाने से उनकी पढ़ाई बाधित हो गई है।
ऐसे में बच्चों का पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब होने की आशंका है।
क्रिस्टोफर पॉल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि
इन बच्चों को पुनः वापस लाया जाए और
कम से कम उन्हें इस शैक्षणिक वर्ष की वार्षिक परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए,
ताकि उनका भविष्य और एक पूरा साल बर्बाद न हो।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है और बच्चों की शिक्षा को लेकर क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।




