न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग ने जिला अस्पताल में चलाया जागरूकता अभियान; ‘लेट्स ब्रेक इट डाउन’ थीम पर दिया संदेश

न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग ने जिला अस्पताल में चलाया जागरूकता अभियान; ‘लेट्स ब्रेक इट डाउन’ थीम पर दिया संदेश

​विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने आमजनों को दी हेपेटाइटिस के कारण, लक्षण व बचाव की जानकारी; 2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य

 | बैकुंठपुर

​न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा फैकल्टी तरुण कुशवाहा के सहयोग से नर्सिंग छात्र-छात्राओं के लिए स्वास्थ्य प्रशिक्षण सह जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

​इसी कड़ी में संस्थान के सातवें सेमेस्टर (7th Semester) के छात्र-छात्राओं ने जिला अस्पताल बैकुंठपुर परिसर में एक विशेष स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम आयोजित कर मरीजों, उनके परिजनों और आम जनसमुदाय को हेपेटाइटिस बीमारी के प्रति जागरूक किया।

​वैश्विक थीम ‘लेट्स ब्रेक इट डाउन’ पर दिया जोर

 

​कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष के विश्व हेपेटाइटिस दिवस की थीम ‘‘लेट्स ब्रेक इट डाउन’’ (Let’s Break It Down) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस थीम का मुख्य उद्देश्य हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर जांच और सटीक उपचार के मार्ग में आने वाली सामाजिक व प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना है।

​जागरूकता सत्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब हर नागरिक तक बिना किसी भेदभाव के जांच और इलाज की सुविधाएं आसानी से सुलभ हों।

​नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. बारुक ब्लमबर्ग की स्मृति में मनाया जाता है दिवस

 

​स्वास्थ्य शिक्षा सत्र में बताया गया कि हेपेटाइटिस बी वायरस (HBV) की खोज करने वाले और इसके लिए पहला नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Test) व टीका (Vaccine) विकसित करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारुक ब्लमबर्ग के जन्मदिवस को सम्मान देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।

​हेपेटाइटिस के प्रकार, कारण और फैलने के माध्यमों की दी गई विस्तृत जानकारी

​न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट के भावी नर्सिंग पेशेवरों ने अस्पताल में उपस्थित लोगों को हेपेटाइटिस बीमारी से जुड़े विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया:

  • लीवर का संक्रमण: हेपेटाइटिस मुख्य रूप से मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग लीवर (यकृत) में होने वाला एक गंभीर संक्रामक रोग है।
  • वायरस के 5 मुख्य प्रकार: हेपेटाइटिस वायरस मुख्यतः पाँच प्रकार (A, B, C, D और E) के होते हैं।
  • संक्रमण के कारण:
    • हेपेटाइटिस A और E: दूषित भोजन, अस्वच्छ खान-पान और दूषित जल के सेवन से फैलते हैं।
    • हेपेटाइटिस B, C और D: एचआईवी (HIV) की ही तर्ज पर संक्रमित रक्त के लेन-देन, शरीर के संक्रमित द्रवों (Body Fluids), असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा एक ही संक्रमित सिरिंज/इंजेक्शन के इस्तेमाल से फैलते हैं।

​पहचानें लक्षण: समय पर जांच व चिकित्सकीय प्रबंधन ही बचाव

​छात्राओं ने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में:

  1. ​त्वचा और आँखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना (पीलिया/Jaundice)।
  2. ​भूख में भारी कमी आना और लगातार उल्टी व जी मिचलाना।
  3. ​हफ्तों और महीनों तक बना रहने वाला बुखार और अत्यधिक शारीरिक थकान।

​कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने अपील की कि लक्षण दिखाई देते ही बिना किसी लापरवाही के निकटतम शासकीय स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में जाकर जांच कराएं। उचित समय पर परीक्षण और सही चिकित्सकीय प्रबंधन से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है।

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