
राजनांदगांव _शहर के पुराने हॉस्पिटल के सामने, गुरुद्वारा के बाजू में स्थित ‘लिटिल मिलेनियम (Little Millennium) प्ले-स्कूल’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्कूल फर्स्ट फ्लोर पर संचालित किया जा रहा है, जहाँ प्लेग्रुप, नर्सरी और किंडरगार्टन जैसे 2 से 5 साल के नन्हे बच्चे पढ़ने आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल —
❓ क्या नियम इतने छोटे बच्चों का स्कूल फर्स्ट फ्लोर पर चलाने की अनुमति देते हैं?
बाल सुरक्षा व शिक्षा नियमों के अनुसार नन्हे बच्चों के स्कूल ग्राउंड फ्लोर पर होने चाहिए, ताकि आग, भूकंप या किसी आपात स्थिति में बच्चों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। लेकिन यहाँ तो मासूम बच्चों की सुरक्षा सीढ़ियों के भरोसे छोड़ दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका व्यस्त मार्ग पर स्थित है, जहाँ दिनभर आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में फर्स्ट फ्लोर पर स्कूल संचालन किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।

अब सीधे सवाल प्रशासन से —
क्या ‘लिटिल मिलेनियम’ को फर्स्ट फ्लोर पर संचालन की लिखित अनुमति मिली है?
फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों की जांच किस अधिकारी ने की?
अगर कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
नन्हे बच्चों की जान से जुड़ा यह मामला सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करता है।
कार्रवाई होगी या किसी हादसे के बाद ही फाइल खुलेगी?




