रानीतराई : किसी भी राष्ट्र का निर्माण उसके कोरे सिद्धांतों घोषणाओं व वादों से नहीं वरन् त्याग बलिदान और नेक इरादों से होता है। केवल बयान बाजी और प्रदर्शन करने से समस्या का समाधान सम्भव नहीं है। चीन जैसे देश दृढ संकल्पों और मजबूत इच्छा शक्ति से अफीम से मुक्त हो गया वैसे ही हमारा देश भी पूर्ण शराब बन्दी लागू कर शराब से छुटकारा पा सकता है।
शराब की आदत अनेक अपराधों दुष्कर्म प्रेरित विचारों व अनेक घातक बिमारियों की जननी है शराब से शारीरिक आर्थिक और नैतिक पतन होता है। नशे के सेवन से हृदय व फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचता है। अधिकतर अपराध नशे की हालत में ही होते हैं। नशा किसी भी तरह का हो विनाश का कारण है।शराबबन्दी से देश का चहुँमुखी विकास व उत्कृष्ट सामाजिक उत्थान होगा। किसी भी प्रकार का नशा स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक ही होता है। नशे के सेवन से हृदय व फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचता है। नशा किसी भी तरह का हो विनाश का कारण है। अतः नशे पर नियंत्रण आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ में भी नशाखोरी की स्थिति चिन्ता जनक है। छात्र समेत नयी पीढ़ी का नशे की गिरफ्त में आना सरकार व समाज के लिए चिंता का विषय होना चाहिये। शराब पीकर तेज रफ्तार गाडी चलाना कुछ लोगों का शौक बन गया है। शराब जनित अपराध व दुर्घटनाएं भी बढी हैं। मौजूदा परिवेश में नशे के कारण दाम्पत्य व पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। परिवार तबाह हो रहे हैं। नशा स्वयं परिवार व भावी पीढ़ी का विनाश करते हैं ।

युवा पीढ़ी देश का भाग्य एवं भविष्य होता है परन्तु दिशाहीनता के कारण कुछ लोगों को बहकते व भटकते कदम शोचनीय व चिन्ताजनक है। नशे की प्रवृत्ति का उन्मूलन और नशीले पदार्थों व दवाइयों पर प्रतिबंध लगा कर युवाओं के साथ होने वाली अप्रिय व दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। हिंसा नशे से लेकर यौन अपराधों में वृद्धि नशे का दुष्परिणाम है। ऐसे में सरकार को शराब का प्रसार रोकने व उसके दुष्परिणामो से समाज को बचाने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।
विशेष रूप से युवाओं के ख्याल व सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए शराब बन्दी के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। कभी शराब को जहर व दुर्गुणो की जननी मान कर इससे दूर रहने की सलाह दी जाती थी परन्तु आज इसके विपरीत यह आधुनिक फैशन का अंग बन गया है। शराब बन्दी के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रयास की जरुरत है ।
समाज के अग्रणी लोगों को शराब से होने वाले दुष्परिणाम को बताकर व शराब बन्दी करवाकर दुर्व्यसनमुक व बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। समाजसेवी संगठन व सामाजिक कार्यकर्ता सब मिलकर प्रयास करें तो निश्चित रूप से समाज को नशामुक्त बनाया जा सकता है।
ऐसा विकास अधिक मायने नहीं रखता जहाँ मानवीय व नैतिक मूल्यों का कोई स्थान न हो ज्ञातव्य है कि शराब से नैतिक पतन होता है। अगर हम मानव समाज को नशा मुक्त रखना चाहते हैं तो गुटका तम्बाकू का विज्ञापन क्यों। लोगों को शराब दुकान खोलने के सरकारी फैसले के विरुद्ध आन्दोलन करना पडता है जो कि एक विडंबना है। शराबबन्दी नहीं करने के पक्ष में अनेक तर्क दिये जाते हैं।
परन्तु वास्तविकता यह है कि जिन प्रान्तों में शराब बन्दी हुआ है वहां अपराध का ग्राफ कम हुआ है। कई परिवारों की स्थिति भी सुधरी है। शराबबन्दी के बाद बिहार और गुजरात में अपराध में कमी आई है। जहां जहां मद्य निषेध हुआ है वहां के श्रमिक व मजदूर वर्ग अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ सुखी व खुशहाल हैं। समग्र विकास के लिये मुख्य मुद्दों को क्रियान्वित करने की जरुरत है। मूल्यों व मुद्दों आधारित होना चाहिए।
असल मुद्दों के समाधान के लिए लोक लुभावन वादों व छोटी मोटी मुफ्त सुविधा प्रदान करने की नहीं बल्कि शराब बन्दी जैसे संवेदनशील व गम्भीर मुद्दों के वादा पूरा करने का नैतिक साहस चाहिए। वर्तमान समय में जनता से वादा खिलाफी प्रचलन बन गया है। हमें इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए कि वादाखिलाफी सत्ता केन्द्रित राजनीति का परिणाम है जो राजनीति के गिरते स्तर को दर्शाता है।
हम सभी को यह सोचना और समझना होगा कि जब-जब हमारा समाज दुरव्यसनो व दुर्गुणो में लिप्त रहेगा व्यक्ति से लेकर राज्य व राष्ट्र की उन्नति अवरुद्ध बनी रहेगी। नशामुक्ति जीवन की अनिवार्य आवश्यकता होना चाहिए। अपनी व्यक्तिगत सम्पन्नता व राष्ट्र की समृद्धि के लिए हम शराब व तम्बाकू जैसे तुच्छ व्यसन का त्याग नहीं कर सकते तो हमारी शान्ति पूर्ण जीवन की आशा निराशा ही सिद्ध होगी नशामुक्ति से ही हम सबकी भलाई है। बिहार व गुजरात की भांति छत्तीसगढ़ में भी शराबबन्दी होना चाहिए।