डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “स्वस्थ्य जीवन के लिए पर्यावरण का संरक्षण हमारा दायित्व”

रानीतराई :- मानव जीवन व समस्त जीवों के लिए जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गम्भीर चिन्ता का विषय है। जलवायु परिवर्तन से बढ रही गर्मी मानव के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है। गर्मी की कठिनाई से प्रभावित दिनचर्या के कारण जीविका उपार्जन पर असर पड़ा है। मौजूदा परिवेश में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके जिस चकाचौंध को सामने लाए हैं वह मानव जीवन के लिए खतरनाक है। वर्तमान समय में हो रही अनियमित बारिश धूप गर्मी ने व्यक्ति के दैनिक जीवन को काफी कठिन कर दिया है। औद्योगिक गतिविधियाँ आधुनिक व सुविधायुक्त जीवनशैली जलवायु के लिए जिम्मेदार है। भोगवादी जीवनशैली और कथित आधुनिक विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जलवायु संकट बढा है। पर्यावरण प्रदूषण के नयी-नयी बीमारियां बढ रही है। जीवनशैली में परिवर्तन लाने की जरुरत है और सर्वाधिक आवश्यकता प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियाँ त्यागने की है।
रासायनिक खेती के परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। रसायन आधारित खेती के कारण शुद्ध और पोषणयुक्त भोजन का अभाव हो गया है। आज मनुष्य रसायनयुक्त भोजन करने पर मजबूर हैं। फसल उत्पादन में जहरीले रसायनों के उपयोग के कारण विभिन्न बीमारियाँ बढ रही हैं। रसायनो के अधिक इस्तेमाल के कारण भोजन में आवश्यक पोषक तत्व का अभाव हो गया है। मृदा की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो रही है। पशु-पक्षियों के विलुप्तीकरण का एक कारण रसायनयुक्त अन्न भी है। रसायनो के उपयोग व प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली खेती से बचने की जरुरत है। प्रकृति का संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी होनी चाहिए। वर्तमान समय में जीवन प्रकृति के विपरीत होने लगा है।प्राकृतिक जीवनशैली से मिलने वाले लाभों से हमें लाभान्वित होना चाहिए। प्राकृतिक सान्निध्य से उपजी उर्जा शान्ति स्फूर्ति व सक्रियता का स्रोत है। अनियन्त्रित व अनियमित खान-पान के कारण बीमारियां घेर रही हैं। आधुनिक सुविधाओं के चलते आज हम प्राकृतिक उर्जा से उपजी स्वास्थ्य लाभ से हम वंचित हो रहे हैं। स्वस्थ जीवन के लिए मनुष्य का पंचतत्व से संतुलन आवश्यक है। जब हम प्रकृति के विपरीत कार्य करने लगते हैं तो अपनायी जाने वाली अप्राकृतिक जीवन शैली हमारे शरीर को बीमार करने लगते हैं और हम विभिन्न तरंह के शारीरिक व मानसिक रोगों से हम घिरने लगते हैं। प्राकृतिक जीवनशैली से मिलने वाले लाभों से हमें लाभान्वित होना चाहिए। प्राकृतिक सान्निध्य से उपजी उर्जा शान्ति स्फूर्ति व सक्रियता का स्रोत है। हमें समझना होगा कि पेड़ पौधे मिट्टी प्रकाश आदि प्राकृतिक तत्व हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यदि हम उन्हें ही अपने जीवन से दूर रखेंगे या उनके सम्पर्क से वंचित रहेंगे तो निश्चित रूप से बीमारियां हमे घेर लेंगी। पेड पौधे मिट्टी प्रकाश आदि के सम्पर्क से शरीर में तेज बल शक्ति व स्फूर्ति का संचार होता है। इससे स्पष्ट है कि प्रकृति का मानव जीवन में कितना अहम योगदान है। वर्तमान समय में सर्वाधिक आवश्यकता प्रकृति को बचाये रखने की है। प्रकृति का संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी होनी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट न करें। जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए यह सबसे बडा कदम होगा। प्रकृति को बचाना सभी का महत्वपूर्ण दायित्व है।
B. R. SAHU CO-EDITOR
B. R. SAHU CO-EDITOR
B.R. SAHU CO EDITOR - "CHHATTISGARH 24 NEWS"

Advertisement

ताज़ा खबरे

Video News

error: \"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़\" के कंटेंट को कॉपी करना अपराध है।