डॉ. बिजेंद सिन्हा जी का संपादकीय लेख “राजनीति का बढ़ता अपराधीकरण नए राष्ट्र निर्माण में बाधक”।

Cg24News-R :- हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। इस चुनाव को लेकर एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस् का विश्लेषण सामने आया है जिससे अनुसार यहाँ हर तीसरे उम्मीदवार पर आपराधिक मामले हैं। राजनीति में यह बुराई देशव्यापी है। राजनीति में वंशवाद, परिवारवाद, धार्मिक व जातीय ध्रुवीकरण और धनबल एवं बाहुबल जैसे लोकतंत्र व निष्पक्ष चुनाव में बाधक तत्व पहले ही व्याप्त है। आधुनिकता, शिक्षा का ग्राफ बढ़ने व इतनी राष्ट्रीय स्तर की जागरूकता के बाद भी राजनीति में जातिवाद का साया पड़ना चिन्ताजनक है। चुनाव परिष्कृत व लोकतंत्र कैसे मजबूत बने, इस विषय पर चिंतन किया जाना चाहिए। राजनीति में अपराध का बढ़ता प्रभाव चिन्तन का विषय है। राजनीति में अपराधीकरण देशव्यापी समस्या है। ऐसी विसंगतियों के फलस्वरूप ही संविधान विरोधी तत्व पनपते हैं। यह विडम्बना ही है कि लोकतंत्र दागी या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के भरोसे होता जा रहा है।
राजनीति को विमर्श का विषय व जनसेवा का सशक्त माध्यम माना जाता है लेकिन मौज़ूदा परिवेश में राजनीति पदलिप्सा एवं गठजोड़ तक सीमित होता जा रहा है। जन समुदाय समाज के अग्रणी लोगों को का ही अनुकरण करता है। इसलिए राजनीति में बढ़ते अपराध का प्रभाव समाज में निरंतर बढ़ रहे अपराध नियन्त्रण के लिए बाधक है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मतदाताओं के सामने राजनैतिक दलों की ईमानदारी व निर्दोषता जैसी शुचिता की नहीं बल्कि देश के भविष्य का भी सवाल है। राजनीति में वंशवाद, परिवारवाद, धनबल व बाहुबल का प्रभाव लोकतंत्र पर आघात है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजनीतिक जीवन में वर्तमान दौर में जो गिरावट आई है वह कैसे दूर हो। युवा मतदाताओं को विशेष कर इस विषय पर विचार तो करना ही होगा कि देश के अग्रणी लोग अपने सामने जीवन का कुछ आदर्श रख कर चले।
राजनीति जीवन में वर्तमान दौर में आई नैतिक गिरावट व अन्य समस्याओं के समाधान के लिए जनता में विवेक व जागरूकता की जरूरत है। चुनाव सुधार व राजनीतिक दलों में मापदंड की जरूरत है जिससे इन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को रोका जा सके। राजनीति में वंशवाद, परिवारवाद ,धनबल ,बाहुबल व बढ़ते अपराध पर काबू पाया जाना चाहिए। चुनाव सुधार की प्रक्रिया राजनैतिक दलों से ही शुरू होना चाहिए। राजनीतिक दलों को सदस्य बनाने के लिए मापदंड तय किया जाना चाहिए कि सदस्य बनने वाले का स्वभाव कैसा है। सेवाभावी है या कोई स्वार्थवश प्रयोजन से जुड़ना चाहता है। गलत शुरूआत ही आगे की बुराइयों को जन्म देती है ।चुनाव सुधार के साथ राजनीति दलों को पार्टी में शुचिता बनाये रखने के लिए निश्चित मापदंड अपनाना चाहिए। सदस्यता, पदाधिकारियों व उम्मीदवारों के चयन व आगे के चयन की प्रक्रिया राजनैतिक दलों को तय करना चाहिए। राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की बढ़ती भागीदारी चिन्ताजनक है। इन समस्याओं का समाधान के लिए जनता में जागरूकता ,परिष्कृत दृष्टिकोण व नैतिक साहस की जरूरत है जिससे देश संकीर्णता व पदलिप्सा की राजनीति से मुक्त हो और जनता हर दृष्टि से दुरूस्त व प्रबुद्ध बने एवं समाज में सुव्यवस्था कायम हो।

B. R. SAHU CO-EDITOR
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