देवमाताश्री हास्पिटल ने अनाथ बच्चे का ईलाज करने से मना कर दिया

गरियाबंद : गरियाबंद जिला के देवभोग ब्लॉक अंतर्गत विवादों के घेरे मे सुर्खियां बटोरने वाले देवभोग मे स्थित देवमाताश्री हास्पिटल का दिखा अमानवीय चेहरा। 14 साल के चोटिल अशोक ठाकुर का ईलाज करने से किया मना। अशोक ठाकुर 8 वीं का छात्र है ना मां ना पिता अशोक ठाकुर महज 5 साल का था तब पिता संतोष ठाकुर चल बसे कोरोनाकाल मे मां का देहांत होते ही अशोक ठाकुर अनाथ हो गया।

गाड़ी के टक्कर से अशोक ठाकुर को चोट लगी आंख के बाजू से खुन बह रहा था कंधा भी चोटिल था घटना स्थल से करीब देवमाताश्री हास्पिटलक होने के कारण दोनों पक्ष के सहमति के बाद देवमाताश्री हास्पिटल मे ईलाज कराना उपयोगी समझा गया लेकिन हास्पिटल को बार बार गुहार लगाने के बावजूद ईलाज नहीं किया गया व अन्य जगह ले जाने की सलाह दी गई जो हास्पिटल के दोगले व लापरवाह चेहरा को साफ दर्शाता है।एक चिकित्सक के लिए मरीजों की सेवा ही फर्ज और धर्म है। इस सेवा में किसी तरह की कोई कमी नहीं रहने दी जाती है।

भरसक कोशिश होती है कि अपनी चिकित्सकीय सेवा के जरिये मरीजों को संतुष्ट करें। लेकिन अशोक ठाकुर खुन से लथपथ कराहता रहा था कंधे के चोट से तठपता रहा परंतु देवमाताश्री हास्पिटल ने ईलाज करने से साफ मना कर दिया। साथियों के मदद से डी.डी ठाकुर के पास पहुंचे ही मरीज का ईलाज कर दवा किया गया जिससे मरीज अब ठीक है। इस तरह के लापरवाह डाक्टरों का उंची पंहुच व रसूख के कारण निसाहय गरीब कमजोर लोगों का देवभोग मे हमेशा से शोषण होता आ रहा है।

कभी हाई फीस के लिए शोषण तो कभी खुद की मेडिकल से दवाई लेने के लिए बाध्य होने पे मजबूर मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं है। देवभोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बीजली,सड़क, के लिए सदियों से तरसता आ रहा जिसका फायदा रसूखदार व्यवसायी लगातार उठाते आ रहे है। कब होगी गरीब मरीजों का उचित ईलाज कब होगा न्यासंगत समानता का अधिकार कब मिलेगी देवभोग को लूटेरे डाक्टरों से मूक्ति कब होगी विकास की चित्कार का अंत पुछता देवभोग कि पवित्र धरती

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