स्वास्थ्य विभाग के 3 करोड़ गबन मामले में गिरफ्तारी : बीएमओ, 3 कोषालय अधिकारियों सहित 11 कर्मचारियों के नाम दर्ज है एफआईआर

किरीट भाई ठक्कर , गरियाबंद। जिला कोषालय अधिकारियों / कर्मचारियों तथा मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों / कर्मचारियों की मिलीभगत से 3 करोड़ से अधिक राशि के गबन मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी सूचना प्राप्त हुयी है। हालांकि मैनपुर थाना प्रभारी द्वारा फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं कि गई, किन्तु सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामले में संलिप्त 11 नामजद आरोपियों में से एक वीरेंद्र भंडारी सहायक ग्रेड 03 को गिरफ्तार किया गया है।

आपको बता दें कि वर्ष 2016 – 17 से 2019 – 20 तक जिला कोषालय तथा मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत कर शासन के वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों तथा वित्तीय प्रबंधन की मूल भावनाओं के विपरीत जाकर, राज्य की समेकित निधि तथा लोक लेखा से कुल 3,13,43,971.00 अक्षरी तीन करोड़ तेरह लाख तिरालीस हज़ार नौ सौ ईकहत्तर रु की अवैध क्रमिक चोरी ( गबन ) कर ली गई थी। प्रारम्भिक जांच में मामला सिद्ध पाये जाने के बावजूद ना सिर्फ ठोस कार्यवाही अर्से तक लंबित रही, बल्कि शुरुआत में जब मामला सामने आया, तब निम्न श्रेणी के दो लिपिक संतोष कुमार कोमर्रा तथा वीरेंद्र कुमार भंडारी को निलंबित कर प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जाता रहा। आरोप तो ये भी थे कि उक्त गबन के मामले में जांच का दायरा वित्तीय वर्ष 2016 -17 से 2021 – 22 तक होना था किंतु 2019-20 तक ही किया गया।

बिना सत्यापन करते थे भुगतान

तत्कालीन मैनपुर बीएमओ डॉ नेगी के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ 60 कर्मियों के नाम से एरियर्स ,इंक्रीमेंट, अतिरिक्त वेतन के नाम से फर्जी फाइल तैयार किया जाता और खुद प्रमाणित कर बिलों को कोषालय भेजा जाता था। फिर कोष अधिकारी बिना किसी सत्यापन के बिलों का भुगतान कर देते थे। इसके बाद ज्यादातर कर्मियों के भुगतान, उनके खातों की बजाय खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा बताये गये पंजाब नेशनल बैंक के निजी खाते में किये जाते थे। जिन कर्मियों के खाते में सीधा भुगतान चला जाता था, उन्हें गलती से भुगतान होना बता कर रूपये वापस मांग लिये जाते थे। इस तरह 3 साल में 3 करोड़ 13 लाख 43 हजार 971 रुपये निकाल लिये गये ।

जीरो बजट से आहरण

जिला प्रशासन द्वारा मामले की जांच के लिये देवभोग बीएमओ डॉक्टर सुनील भारती और तत्कालीन एडीएम चौरसिया से जांच करवाई गई। जिसके बाद गड़बड़ियों की पुष्टि होने पर एडीएम चौरसिया ने वर्ष 2022 में जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी थी। एडीएम ने अपने प्रतिवेदन में लेख किया कि, मैनपुर बीएमओ के द्वारा फर्जी तरीके से निकाली गई यह रकम कोषालय में मौजूद जीरो बजट से आहरित की जा रही थी। जिसमें कोषालय अधिकारियों की पूरी संलिप्तता थी।

ऐसे फूटा भांडा –

अक्टूबर 2019 में फर्जी बिलों से तैयार राशि सीधे मैनपुर ब्लॉक में पदस्थ कई कर्मियों के खाते में पहुंच गई। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर नेगी ने सभी कर्मियों को अपने खातों से रकम आहरण कर वापस करने के लिये कहा। कुछ कर्मचारियों ने रकम वापस कर दी, किन्तु 6 कर्मी ऐसे थे जो बिना लिखा पढ़ी रकम वापस करने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कर्मचारी यूनियन और उच्च अधिकारियों को मामले की शिकायत की जिसके बाद भांडा फूट गया।

इनके विरुद्ध हुई है नामजद एफआईआर

वर्तमान पदस्थ मैनपुर बीएमओ डॉ गजेंद्र ध्रुव की रिपोर्ट पर तत्कालीन बीएमओ डॉ के के नेगी, वर्तमान बेमेतरा में पदस्थ जिला कोषालय अधिकारी गुरुवेंद्र साव, महासमुंद में पदस्थ कोषालय अधिकारी डीपी वर्मा, बलौदा बाजार में पदस्थ कोषालय अधिकारी के के दुबे के अलावा लिपिक जीसी कुर्रे, संतोष कोमर्रा, भोजराज दीवान,वीरेंद्र भंडारी, वार्ड बॉय विनोद ध्रुव वाहन चालक लुकेश चतुर्वेदानी,भारत नंदे के खिलाफ मैनपुर थाने में धारा 409,420,467,471,120 बी के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की जांच जारी है, जबकि इनमें से एक आरोपी भारत नंदे की मृत्यु हो चुकी है।

"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के लिए किरीट ठक्कर की रिपोर्ट
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किरीट ठक्कर "छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" संवाददाता

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