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डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “प्रेम की आड़ में भरोसे पर आघात”।
Cg24News-R :- हाल ही में महिला द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने होने डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “प्रेम की आड़ में भरोसे पर आघात”। पति की हत्या का मामला सामने आया है। यह घटना पूरे भारतीय समाज को विचलित करती है।साथ ही पारिवारिक मूल्यों पर आघात है। यह सामान्य घटना नहीं है बल्कि समाज में कई सवाल खड़े करती है।मौजूदा दौर में सुख के साधन सुविधाएँ बढ़े हैं लेकिन उसी अनुपात में प्रेम, विश्वास और मानवीय संवेदना में कमी आई है।एक- दूसरे के प्रति विश्वास का स्थान शक,सन्देह और कठोरता ने ले लिया है। वर्तमान दौर में संवेदनहीनता, आक्रमकता, व्याभिचार, अनाचार पूरी समर्थता के सहारे बढ़ा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रेम संबंध व पारिवारिक रिश्ते को लेकर हिंसक घटनाएं हुई हैं। कहीं पत्नी की हत्या, कहीं पति की हत्या, कहीं प्रेमिका की हत्या, कहीं प्रेमी से मिलकर अपने होने वाले पति की हत्या का, मामला सामने आता है। मौजूदा परिवेश में महिलाओं द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने होने वाले पति की हत्या की घटनाएं ज्यादा चर्चित हैं।इन घटनाओं ने न सिर्फ परिवार संस्था के लिए डर पैदा किया है बल्कि यह साबित होता है कि विवाह संस्कार संकट से जूझ रहा है। ।क्या ऐसे समाज की रचना हो रही है जहाँ परिवार निर्माण से पहले व्यक्ति को अपने जीवन की रक्षा के लिए सोचना होगा। किसी के द्वारा की जा रही षडयंत्र पूर्वक ऐसी हत्याएँ चिन्ताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। मामला या तो लव मैरिज का हो या फिर अरेंज मैरिज का, इन मामलों में हिंसा के किसी भी रूप का समर्थन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति किसी रिश्ते को स्वीकार नहीं करना चाहता है या रिश्ता पसंद नहीं है तो उसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार करने का अधिकार है।’ अपनी पसंद अपना हक ‘ की प्रवृत्ति रखते हुए अपनी पसंद से जीवनसाथी चुन सकता है । व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दौर, शिक्षित व आधुनिक समाज में अपनी पसंद से जीवन साथी चुनने का अधिकार भी है। लेकिन किसी रिश्ते से छुटकारा पाने के लिए किसी निर्दोष की जान ले लेना मानवीय जीवन पर धब्बा है।आधुनिकता, खुलापन ,शिक्षा का स्तर बढ़ने व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बाद भी किसी रिश्ते को अस्वीकार करने का साहस रखने के बजाय किसी निर्दोष की जान लेना भावी पारिवारिक व्यवस्था के लिए चुनौती है और गिरते नैतिक मूल्यों व मानवीय संवेदना की कमी को दर्शाता है। कथित शिक्षित व आधुनिक समाज में पनप रहा यह प्रवृत्ति परिवार संस्था पर आघात है। भौतिकता, खुलापन व भोगवाद की संस्कृति से भी इन घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। ऐसी घटनाओं ने समाज में बढ़ते व्यभिचार व अविश्वास पर चर्चा का विषय बना दिया है। यौन-संबंधों की उच्छृंखलता व सारी मर्यादा ओं को पार कर देने वाली उच्छृंखलता ने पारिवाधरिक मूल्यों को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है। बढ़ती भौतिकता व उपभोक्तावादी संस्कृति ने रिश्तों को प्रभावित किया है। आधुनिक मूल्यों की बात करने वाले समाज में इस तरह की घटना मानवीय मूल्यों का स्तर गिराता है।वर्तमान समय में भौतिकता, विज्ञान व टेक्नोलॉजी और भौतिक साधन सुविधाएँ बढ़े हैं।परन्तु नैतिक मूल्यों, नीति, मर्यादा आदि मूल्यों में कमी आई है। नीति,मर्यादा के बिना समाज का व्यवस्था क्रम चलना असम्भव है। मर्यादा का उल्लंघन होते ही ध्वंस की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। आधुनिक समाज के परिवेश में इन अनैतिक तत्वों का संयोग व समावेश तीव्र नैतिक पतन पैदा कर रहा है। वर्तमान दौर में ऐसी हिंसक घटनाओं पर नियंत्रण की जरूरत है। उन सामाजिक कारणों को समझना होगा जिसके कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं।

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