पलाश क्रांति: MCB में DFO मनीष कश्यप की पहल से 400 किसान बने लखपति

  • पलाश क्रांति: MCB में DFO मनीष कश्यप की पहल से 400 किसान बने लखपति, पलायन रोकने में बड़ी सफलता
  • मनेंद्रगढ़: ‘महुआ बचाओ’ के बाद ‘लाख पालन’ में रिकॉर्ड; 6 हज़ार पेड़ों पर उत्पादन कर वनमंडल बना आत्मनिर्भर केंद्र
  • लाख क्रांति: मनेंद्रगढ़ में पलाश के पेड़ों ने दी 400 किसानों को ‘लखपति’ बनने की राह 

MCB  ; मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में बहुतायत में पाए जाने वाले पलाश (परसा) के पेड़, जो अब तक उपेक्षित थे, डीएफओ मनीष कश्यप की अनूठी और दूरदर्शी पहल के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन गए हैं। उनकी ‘लाख पालन’ क्रांति ने मात्र दो वर्षों में 37 गाँवों के लगभग 400 किसानों को अतिरिक्त आय का सशक्त ज़रिया दिया है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है बल्कि जिले से पलायन रोकने में भी बड़ी सफलता मिली है।

“लाख पालन की इस वैज्ञानिक और सफल पहल ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वन संपदा का उपयोग स्थानीय रोजगार सृजन के लिए किया जा सकता है।”

‘लाख’ बन गया ‘लाखों’ की आमदनी का स्रोत

डीएफओ मनीष कश्यप ने पलाश के पेड़ों पर रंगीनी लाख का वैज्ञानिक तरीके से पालन शुरू करवाकर एक ऐसी क्रांति की शुरुआत की, जिसने किसानों की आय में खेती-किसानी के अलावा ₹30,000 से ₹40,000 तक का अतिरिक्त इजाफा किया है।

इस पहल की सबसे बड़ी सफलता यह है कि जिस ‘बीहन’ (बीज) लाख की पहले समस्या थी, अब उसके उत्पादन में मनेंद्रगढ़ वनमंडल आत्मनिर्भर बन गया है। वनमंडल का लक्ष्य भविष्य में पूरे छत्तीसगढ़ को बीहन लाख सप्लाई करना है, जिससे छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र बीहन लाख की आपूर्ति के लिए झारखंड के बाद दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

डीएफओ कश्यप की दूरदर्शिता की जीत
इस अनूठी सफलता का श्रेय डीएफओ मनीष कश्यप को जाता है, जो पहले भी जिले में “महुआ बचाओ अभियान” चलाकर खासी प्रशंसा बटोर चुके हैं . उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए दिल्ली में सम्मानित भी किया जा चुका है।

शुरुआत में भौता, नारायणपुर, छिपछिपी, बुंदेली जैसे कुछ गाँवों में शुरू की गई यह पहल आज सफलता की मिसाल बन चुकी है, जहाँ 6,000 पेड़ों पर लाख का उत्पादन हो रहा है।

केस स्टडी: ऐसे बदल रही है किसानों की तकदीर
“वनमंडल की यह पहल किसानों के लिए कितनी फायदेमंद साबित हो रही है, इसे दो प्रमुख उदाहरणों से समझा जा सकता है:

किसान का नाम गांव (समिति) निवेश (लागत) आय (2024-25) शुद्ध लाभ, सर्वजीत सिंह छिपीछिपी (भौता) ₹10,000 ₹68,750 ₹58,000 (दो साल में), उदयनारायण नारायणपुर (भौता) ₹15,000 मुनाफे का गणित: ‘कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस’ के अनुसार, जितना बीहन लाख बीज के रूप में लगाया जाता है, उसका 2.5 गुना तक उत्पादन होता है, जिससे किसानों को डेढ़ गुना शुद्ध लाभ मिलता है।

विकास यात्रा और भविष्य का लक्ष्य : लाख पालन का कार्य, जो कभी अवैज्ञानिक तरीकों से खत्म हो गया था, उसे डीएफओ कश्यप के नेतृत्व में पुनः शुरू किया गया है और इसकी विकास यात्रा शानदार रही है:

शुरुआत (अक्टूबर 2023): सिर्फ 34 कृषकों के 276 पेड़ों में 2.54 क्विंटल बीहन लाख का संचरण किया गया। आत्मनिर्भरता की ओर (जुलाई 2025): 10 समितियों के 27 गाँवों के 205 कृषकों ने 25.50 क्विंटल बीहन लाख का संचरण किया, जिसमें से 80% स्थानीय किसानों ने खुद उत्पादित किया।

वर्तमान लक्ष्य (अक्टूबर 2025): वर्तमान में 37 गाँवों के 400 कृषकों के यहाँ कुल 60 क्विंटल बीहन लाख लगवाया गया है। यह सारा बीहन स्थानीय किसानों द्वारा ही उत्पादित किया गया था। मनेंद्रगढ़ वनमंडल ने अगले वर्ष तक उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है, जो छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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