छत्तीसगढ़ी वेशभूषा, गहना जेवर संस्कृति अऊ छत्तीसगढ़ के प्रति समर्पित “लक्ष्मी नाग”

💐जन्मदिन पर विशेष💐
छत्तीसगढ़ी वेशभूषा गहना जेवर संस्कृति के प्रति समर्पित “लक्ष्मी नाग” मिला परिवार और पति का साथ…

रायपुर(संतोष देवांगन) : आज हम बात करते हैं उनकी जिनके रग रग में छत्तीसगढ़ी संस्कृति बोली भाखा गहना जेवर और वेशभूषा के प्रति प्रेम भरा है उनका नाम है श्रीमती लक्ष्मी नाग । लक्ष्मी नाग का जन्म गरियाबंद जिले के एक छोटे से गांव: माल गांव में हुआ। जिन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने पापा के काम में हाथ बटाती। मात्र 10 वर्ष में ही अपने पापा के साथ होटल में काम करना शुरू के दी थी। वह बचपन से बहुत ही गरीबी परिस्थितियों सामना की।

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10 वर्ष में ही पिता के साथ होटल संभाला
लक्ष्मी नाग
कहती है कि होटल में काम करते हुए ही उसे लोगों के ताना बाना सुनते हुए गरिबी मे जीवन यापन करते हुए एक संकल्प ली मन मे आगे बडे़ होकर समाज सेविका के रूप में काम करके उंच निच के भावना लोगों के मन है बहुत सारी कुरितियों से भरा है छोटे विचार को हटाकर ये संदेश छत्तिसगढिया समाज जातपात के करो विदाई हम सब छत्तिसगढिया भाई भाई ये भावना मन में लाना है और भाईचारा के जीवन जीना है साथ ही छत्तीसगढ़ी वेशभूषा गहना जेवर के प्रति प्रेम बढ़ा। कहते है न बचपन में बच्चे का मन बड़ा चंचल और निस्वार्थ होता है । इसी सोच के साथ लक्ष्मी नाग ने अपने सपनों को पूरा करने का मन बना लिया।

पति और परिवार का मिलता है पूरा साथ
कम उम्र में ही उनका विवाह पास के ही ग्राम साढ़ौली में हुआ । पति आरपीएफ पुलिस मे सबइंस्पेक्टर पद मे है । उनके पति का पद स्थापना मनेद्रगढ़ के बंजी गांव में हुआ फिर वहां से इन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर प्राप्त हुआ उन्होंने सबसे पहले कोरिया जिला के छत्तीसगढ़ महिला क्रांति सेना की अध्यक्ष पद संभाला। लक्ष्मी नाग को उनके पति और परिवार का पूरा साथ मिलता है।

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छत्तीसगढ़ महतारी की 11 मूर्ति करेंगी स्थापित
अध्यक्ष पद संभालते ही उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति की स्थापना की इसके साथ ही उन्होंने यह प्रण किया कि अब हम छग के अलग-अलग जिलों में छत्तीसगढ़ महतारी की 11 मूर्ति की स्थापना करेंगे । कुछ साल बाद उनके पति के स्थानांतरण रायपुर में हुआ फिर लक्ष्मी को अपने सपने पूरे करने का 100% मौका मिला। रायपुर आने के बाद उनके जा पहचान का दायरा बढ़ा। यहां कलाकारों से मिली, मिलते उन्हें छत्तीसगढ़ी फिल्म में दो-चार फिल्म में मिल गई अब एक कलाकार के रूप में जानी पहचानी पहचानी जाने लगी।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति जागरूक करना
अब उसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति बोली भाखा वेशभूषा को अधिक से अधिक प्रचारित करने का मौका मिला। बातचीत के दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान दौर में छत्तीसगढ़ के गहना और वेशभूषा विलुप्त हो रही है और इसे बचाने लोगों को जागरुक कर रही हूं और कहती है आज की पीढ़ी को निः संकोच गर्व से छत्तीसगढ़ी गहना वेशभूषा को धारण करना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा प्रारंभ करवाने के लिए की बाइक रैली
आगे, लक्ष्मी नाग 18 दिसंबर 2021 को छत्तीसगढ़ क्रांति सेवा के बैनर तले पर प्राथमिक स्कूल में बच्चों को छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा प्रारंभ करवाने के लिए बिलासपुर से रतनपुर तक बाइक रैली में भाग ली। इसी बैनर पर उन्होंने हजारों की संख्या में रायपुर के बूढ़ा तालाब में बूढ़ादेव के गगनचुंबी कांसा की मूर्ति बनाने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ से कांसा दान अभियान भी चलाया जिससे प्रदेश भर से काफी कांसा का बर्तन भी दान में मिला।

छड़ी छाप चुनाव चिन्ह से लड़ी विधायक पद के लिए चुनाव
लक्ष्मी ने सन 2023 – 24 में रायपुर उत्तर विधानसभा के लिए जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी से छड़ी छाप चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार बनकर विधायक पद के लिए चुनाव लड़ी। छत्तीसगढ़ के लोक पर्व को बढ़ावा देने के लिए जैसे छेरछेरा पुन्नी, सुआ नृत्य, हरेली त्यौहार के लिए लोगों को जागरूक करती है । वे हर वर्ष भिलाई में आयोजित जबर हरेली में वह हिस्सा लेती है वह कई बार नशा के खिलाफ भी आवाज उठाई। और वर्तमान में वह जोहार पार्टी रायपुर शहर के जिला अध्यक्ष है ।

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