गरियाबंद। बीते चार दशकों से नगर के बस स्टैंड में भोजनालय चला रहे है सेवक निषाद इन दिनों अधिकारियों की मनमानी से त्रस्त है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 – 18 में सेवक को बस स्टैंड स्थित इस मकान का पट्टा मिला था , जिसे अधिकारियों की मिली भगत से निरस्त कर दिया गया। इस निरस्तीकरण के विरुद्ध सेवक ने संभागीय न्यायालय में अपील प्रस्तुत की , कमिश्नर कोर्ट द्वारा इस निरस्त आदेश पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन एवं राजस्व विभाग की टीम ने सेवक का ढाबा गिरा दिया। कमिश्नर के स्थगन आदेश को भी दर किनार कर दिया गया।

अधिकारियों की इस मनमानी के विरुद्ध सेवक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बगैर नोटिस 40 साला पुराने काबिज़ मकान तोड़ने के मामले पर हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस नरेन्द कुमार व्यास ने राजस्व विभाग एवं नगर पालिका परिषद के सीएमओ टॉमसन रात्रे और एसडीएम गरियाबंद को मकान ध्वस्त किये जाने के कारणों सहित आगामी सुनवाई 28 मार्च को उपस्थित हो कर जवाब देने को कहा है। इस सबके बावजूद अधिकारियो की मनमानी थमने का नाम नही ले रही। इस मामले में नगर के बड़बोले जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है। पक्ष – विपक्ष दोनों खामोश है।
किन्तु जनता खामोश नही है लोगों के मुँह पर सवाल है कि क्या नगर के पंद्रह वार्डों में सिर्फ अकेला सेवक निषाद अतिक्रमणकारी है ? इसी नगर के वार्ड क्रमांक 09 चंडी चौक में सीमांकन की मांग वर्षो से की जा रही है किंतु यहाँ अतिक्रमण पर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ क्यों बौने हो जाते हैं।




