एक अदद छत के लिये जद्दोजहद : जेल भी जाना पड़ा
किरीट ठक्कर , गरियाबंद। जगजीत – चित्रा सिंह की एक मशहुर गज़ल ” ये तेरा घर ये मेरा घर , किसी को देखना हो गर ….. आपने जरूर सुनी होगी। ये गज़ल सुनकर जितना सुकून मिलता है , एक आम आदमी को उसका अपना घर भी उतना ही सुकून देता है। जनमानस के दिलोदिमाग पर छाई “अपना घर , की भावना को राजनैतिक नेता कैश कराना अच्छी तरह जानते हैं। वर्ष 2022 तक हर किसी को छत मुहैय्या कराने के प्रधानमंत्री के दावे खोखले साबित हुये है।
उल्टे यहाँ तो वनवासी आदिवासियों को अपनी ही सरजमीं पर एक अदद छत मयस्सर नही हो पा रही है। युँ कहने को जिले के कमार आदिवासी राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाते हैं , इन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त है। किन्तु स्वभावगत जंगलों में ही निवास करने वाले इस समुदाय को अब जंगलों में ही नही रहने दिया जा रहा। इसके दो पहलु है , एक पक्ष स्वाभाविक आदत से मजबुर है तो दूसरा पक्ष कानून से बंधा हुआ है। एक पक्ष लाचार मजबुर गरीब है तो दूसरा पक्ष सबल ,पुष्ट और कानूनी ताकत से लबरेज है।
प्रशासन और वन विभाग के अपने ही कायदे कानून है। जंगल को बचाना भी जरूरी है। वैसे इस दिशा में किये जा रहे प्रयत्नों की सार्थकता पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। किन्तु आज हम जिन कमार परिवारों के आशियानें को उजाड़ने की चर्चा कर रहे हैं ,वो ऐसे ही प्रयत्नों का परिणाम है।

पिछले दिनों इन्दागांव परिक्षेत्र कक्ष क्रमांक 1221 कांडसर बीट में ,जंगल काटकर अतिक्रमण कर चुके, लगभग 5 कमार आदिवासी परिवारों के विरुद्ध वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई। वन अधिनियम के तहत इनमें से पाँच पारिवारिक मुखियाओं को जेल भेजा गया। अतिक्रमित क्षेत्र से इनकी झोपड़ियां तोड़ दी गई।
जानकारी के अनुसार ग्राम अमली के रहने वाले इन कमार परिवारों ने उदन्ति सीतानदी टाईगर रिजर्व बफर जोन कांडसर बीट में पिछले एक वर्ष से जंगल काटकर अतिक्रमण कर रखा था। लगातार समझाईस के बाद भी ये जगह छोड़ने तैय्यार नही थे।
इनकी जिद्द के कारण को भी समझना होगा। दरअसल इन्दागांव का आश्रित गांव अमली , इन्दागांव से 13 किलोमीटर दूर है। जहां तक पगडंडियों के सहारे ही पहुंचा जा सकता है। विशेष बात ये है कि अमली तक का आधा रास्ता छत्तीसगढ़ में तो आधा ओडिशा क्षेत्र से होकर जाता है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का आभाव है। राशन या अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं के लिये लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इन्ही परेशानियों को देखते हुये कुछ लोग अब “अमली ,छोड़कर इन्दागांव के आस पास जंगलों में अतिक्रमण कर रहे हैं।
कक्ष क्रमांक 1217 , 1218 , 1219 , 1220 और 1229 गंभीर अतिक्रमण की चपेट में है।

जमानत पर रिहा होकर आये लक्ष्मण नेताम , लालधर नेताम ,दयाराम नेताम , श्रीराम नेताम ,लक्ष्मण सोरी अब कलेक्टर और डीएफओ ऑफिस के चक्कर काटते पूछ रहे हैं कि आखिर अब हम कहाँ रहे ? कहाँ घर बनाये ? इनका आरोप है कि कक्ष क्रमांक 1216 ,1217 ,1218 ,1219 , 1220 तथा 1229 में आधे से अधिक जंगल काटकर अतिक्रमण किया गया है जिसे वन अधिकारी नजर अंदाज कर रहे हैं। सवाल है कि क्या इनके व्यवस्थापन की पहल जिले के उच्च अधिकारी कर पायेंगे ? या कोई जनप्रतिनिधि इनकी मुश्किल का हल निकालेगा।





