जाने इसके विशेष गुण ; इस विलुप्त प्रजाति ‘दोमुंहा सांप ‘सेंड कोवा’ इंटरनेशनल मार्केट में 3 करोड़ से 25 करोड़ रुपए में बिकता है , 1 सांप भी जिंदा हाथ लगा तो बदल जाती है किस्मत; दोमुंहा सांप ‘सेंड कोवा’ क्यों है कीमती
ब्यूरों रिपोर्ट-छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़
राजनांदगांव – वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव श्री एन गुरुनाथन ने कुछ व्यक्तियों द्वारा सांप की विलुप्त प्रजाति को राजनांदगांव में बेचने की गोपनीय सूचना मिलने पर वन विभाग के अमले को संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए । वन विभाग द्वारा राजनांदगांव विकासखंड के सिंघोला बंगाली भोथीपार मार्ग में 5 व्यक्तियों को विलुप्त प्रजाति सांप सेण्ड बोवा को विक्रय करने ले जाते गिरफ्त में लिया गया । जिसमें ग्राम रेंगाडबरी बालोद निवासी दीपक सोनी , शांति नगर राजनांदगांव निवासी मो. हारुन, बेलगांव राजनांदगांव निवासी दीपक , सेक्टर 6 भिलाई निवासी मनोज निर्मलकर एवं मोतीपुर राजनांदगांव निवासी सोमेश कुमार साहू पर कार्रवाई की गई । कार्रवाई में परिक्षेत्र अधिकारी राजनांदगांव श्री टीडी धृतलहरे , सहायक परिक्षेत्र अधिकारी , राजनांदगांव ( शहर ) श्री केके वर्मा एवं वन रक्षक श्री रामसिंह साहू , श्री सुभाष साहू , श्री भावदास साहू , श्री हेमंत साहू , श्री झलेन्द्र दैवेभो शामिल थे ।
जाने इसके विशेष गुण – दोमुंहा सांप ‘सेंड कोवा’ क्यों है कीमती

राजनांदगांव वनमंडलाधिकारी श्री एन गुरुनाथन ने बताया कि विलुप्त प्रजाति सांप ‘सेण्ड बोवा’ की पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका है । सांप सेण्ड बोवा के चमड़े ( खाल ) की विदेशों में बहुत मांग है । धन के लालच में तस्कर इन सांपों की तस्करी करते । जिससे हमारा पर्यावरण संरक्षण प्रभावित होता है । इस तरह इनकी संख्या कम होती जा रही है । इसकी रोकथाम के लिये शासन द्वारा वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 लागू किया गया है ।
अधिनियम के तहत अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई
अपराधियों के विरुद्ध इसी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा ही है । वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव श्री एन गुरुनाथन ने जनसामान्य से अपील की है कि वन्य प्राणियों को किसी तरह से नुकसान पहुंचाया जाता है या थोड़े से धन लाभ के लिए वन्य प्राणियों की तस्करी की जाती है , तो इसकी सूचना तत्काल वन मंडल कार्यालय राजनांदगांव परिक्षेत्र कार्यालय एवं क्षेत्र में पदस्थ वन अमला को दें । ताकि वन्य प्राणियों को बचाया जा सके ।
जाने इसके विशेष गुण – दोमुंहा सांप ‘सेंड कोवा’ क्यों है कीमती
आप सब यह जरूर जानते है की सांप ऐसा जीव है, जो सबसे खतरनाक होता है और इनके नाम सुनते ही लोगों की रोंगटे खड़ी हो जाती है. वहीँ कुछ सांप अपने जहर के कारण बदनाम होते हैं तो कुछ सांप, जो बेहद बड़े होते हैं, वो अपनी ताकत से शिकार का दम घोंटकर मार डालते हैं. दुनिया में दो मुंह वाले सांप भी मौजूद हैं. ये बेहद दुर्लभ होते हैं. भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम Wildlife Protection Act 1972 के तहत इन सांपों को दुर्लभ करार दिया गया है. साथ ही इनका इस्तेमाल तांत्रिक क्रियाओं के लिए किया जाता है. भारत में पाए जाने वाले ये सांप इतने दुर्लभ हैं कि मार्केट में एक सांप करोड़ों में बिकता है।
इंटरनेशनल मार्केट में यह एक सांप 3 करोड़ से 25 करोड़ तक बिकता है

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भारत के राजस्थान में मिलने वाला एक दोमुंहा सांप सबसे ज्यादा डिमांड में होता है. इनका वैज्ञानिक नाम रेड सैंड बोआ है. इस सांप की डिमांड प्राचीन मान्यताओं के कारण है. वैसे तो ये सांप राजस्थान के इलाकों में काफी मिलते हैं लेकिन कुछ मान्यताओं के कारण इनकी जमकर स्मगलिंग होती है. अगर कीमत की बात करें, तो इंटरनेशनल मार्केट में ये एक सांप 3 करोड़ से 25 करोड़ तक बिकता है। यह भी कहां जाता है की इस सांप का वजन यदि 1-KG है तो इसकी कीमत इंटरनेशनल मार्केट में करोड़ो की होगी।
कहावतों और प्राचीन मान्यताओं की वजह से दोमुंहे सांप के मांस कि की जाती है तस्करी
कहा जाता है कि दोमुंहे सांप का इस्तेमाल तांत्रिक क्रियाओं के लिए किया जाता है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इन सांपों का मांस खाने से शारीरिक शक्ति ,सेक्स शक्ति बढ़ती है. साथ ही इस सांप का मांस यौन शक्ति बढ़ाता है. बढ़े शरीर को जवान और खूबसूरत भी बनता है इसके अलावा दोमुंहे सांप के मांस से एड्स जैसी बीमारी का भी इलाज संभव है, ऐसा कहा जाता है. हालांकि, ऐसा होता है या नहीं, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. सिर्फ कहावतों और प्राचीन मान्यताओं की वजह से दोमुंहे सांप के मांस की तस्करी की जाती है।
खासकर बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य में इसकी ज्यादा तस्करी
बतादे की दोमुंहे सांप भारत में कई इलाकों में बहुतायत मिलता है. कई हिस्सों में इसकी तस्करी की जाती है. खासकर बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य में इसकी तस्करी काफी की जाती है. वैसे तो इन साँपों को दोमुंहा सांप कहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि इनके दो मुंह होते हैं. दरअसल, इनकी बनावट ऐसी होती है कि सांप का पूंछ भी मुंह की तरह दिखता है. खतरा महसूस होने पर ये सांप अपना पूंछ उठा लेता है. इससे शिकार उसे मुंह समझ लेता है और कन्फ्यूज हो जाता है कि इसका असली मुंह कौन सा है और हमला किस तरफ करना है।




