राजिम की जनता का दर्द

राजिम विधानसभा क्षेत्र से पिछले 70 सालों से चुनाव लड़ रहे शुक्ल परिवार आज भी रायपुर में निवास करते है, ऐसे में इस बार स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा राजिम विधानसभा में तारी है। अमितेश शुक्ल की विधानसभा में कम उपस्थिति, आमजनो ,कार्यकर्ताओ के फ़ोन नही उठाना, चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
जनता की नाराजगी देख अमितेश शुक्ल को भरे मंच से अगले कार्यकाल में काम करने भगवान की कसम खानी पड़ गई। इसके अलावा वर्तमान विधायक की कार्यशैली से लोंगो में भारी नाराजगी देखी जा रही है, पिछले 5 सालों आमजनों से कटे रहने का आरोप भी लग रहा है।

किरीट भाई ठक्कर ,गरियाबंद। विधानसभा चुनाव के मतदान के लिये कुछ ही घंटों का समय बचा है । छत्तीसगढ़ राज्य में 17 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान शुरू होना है। छत्तीसगढ़ का प्रयाग और धर्मनगरी कहे जाने वाले राजिम विधानसभा में इस बार मतदाताओं के बीच स्थानीय और बाहरी प्रत्याशी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है । मतदाताओं की माने तो शुक्ल परिवार पिछले लगभग 70 वर्षों से राजिम से चुनाव लड़ते आ रहे है, यहां से जितने के बाद श्यामाचरण शुक्ल 3 बार अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके है, किन्तु शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजिम को आज भी वो मुकाम नही मिल सका जिसकी वास्तविक आवश्यकता थी । आमितेश शुक्ल से स्थानीय लोंगो को फ़ोन न उठाने, बात नही करने ,कोई भी काम नही करने की शिकायत तो रहती ही है, मगर उनके करीबी कार्यकर्ताओं के बीच भी यही शिकायत सुनने को मिली है । इस चुनाव में उनकी हर सभा में ये मुद्दे मीडिया की जानकारी में आये हैं। इसी वजह से उन्हें राजिम के कार्यक्रम में राजीव लोचन भगवान की कसम खानी पड़ी और कहना पड़ा कि वो अब डायरी और पेन लेकर चलेंगे, सबके संपर्क में रहेंगे और सबका काम करेंगे। विधानसभा में कम उपस्थिति को लेकर भी अमितेश शुक्ल को काफी फजीहत झेलनी पड़ी है, जिले की ही दूसरी विधानसभा बिन्द्रानवागढ़ के विधायक की उपस्थिति विधानसभा में सबसे ज्यादा रही, तो वही अमितेश शुक्ल की सबसे कम रही। जनता पिछले पांच सालों से इस दंश को झेल रही है और इस बार इन्ही सभी बातों को ध्यान में रखकर वोट करने की बात कह रही है।

वर्तमान परिस्थिति

वर्तमान चुनाव में राजिम विधानसभा क्षेत्र से 11 प्रत्याशी चुनावी समर में है। इन प्रत्याशियों में से कुछ को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है तो कुछ स्थानों पर जनता पिछले पांच वर्षों की भड़ास निकाल रही है। राजिम में भाजपा – आप और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।
राजिम में भाजपा के युवा प्रत्याशी रोहित साहू की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। गांव गांव में उनका जोरदार स्वागत हो रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तेजराम साहू की भी स्थानीय किसानों के बीच अच्छी पहचान है। दो युवा प्रत्याशियों के बीच अमितेश शुक्ल की स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही है। क्षेत्र की जनता अमितेश शुक्ल की कार्यशैली से नाराज हैं।

क्या है समीकरण

राजिम में अमितेश शुक्ल के खिलाफ भाजपा ने रोहित साहू को टिकिट दिया है। इस विधानसभा में कुल 2 लाख 28 हजार 132 मतदाता है । इसमें 1 लाख 12 हजार 66 पुरुष मतदाता है और 1 लाख 16 हजार 48 महिला मतदाता है। राजिम विधानसभा में अनुमानित 72 हजार साहू वोटर्स भी है। राजिम की जनता ने 2003 से लगातार दुबारा किसी भी प्रत्याशी को मौका नही दिया है।कहा जाता है कि राजिम में हार जीत का समीकरण साहू वोटर्स ही तय करते है ।

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"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के लिए किरीट ठक्कर की रिपोर्ट
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किरीट ठक्कर "छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" संवाददाता
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