शशिकांत (सनसनी) अंबागढ़-चौकी । रविवार की शाम अंबागढ़ चौकी थाना क्षेत्र के ग्राम छछानपाहरी में हुई तीन मासूम बच्चों की तालाब में डूबकर दर्दनाक मौत ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। सोमवार को जब गांव की गलियों से एक साथ तीन अर्थियां उठीं, तो हर आंख नम हो गई, और पूरा गांव विलाप के सन्नाटे में डूब गया।
डूबे तीनों मासूम थे घनिष्ठ मित्र
मृतक बच्चों की पहचान नव्यांश कुमार (पिता – सुभाष साहू), हिमांशु (पिता – प्रवीण साहू) और लक्ष्य (पिता – वेदप्रकाश साहू) के रूप में हुई है। तीनों की उम्र महज़ 6 से 7 साल के बीच थी और वे आपस में बेहद घनिष्ठ मित्र थे।
एक बच्चा गांव के प्राथमिक शाला में पढ़ता था। दो अन्य बच्चे अंबागढ़ चौकी स्थित निकी स्कूल में अध्ययनरत थे
हादसा कैसे हुआ?
ग्राम सरपंच पंचराम चंद्रवंशी ने बताया कि रविवार की शाम तीनों बच्चे खेलने निकले थे और खेलते-खेलते गांव के पास स्थित गहरे तालाब में नहाने चले गए। दुर्भाग्यवश, उन्हें तालाब की गहराई का अंदाज़ा नहीं था, और तीनों डूब गए।
शाम लगभग 6 बजे जब कुछ ग्रामीण तालाब की ओर पहुंचे तो उन्होंने सीढ़ियों पर तीनों बच्चों के कपड़े रखे देखे, जिससे अनहोनी की आशंका हुई। ग्रामीणों ने तत्परता से तालाब में खोजबीन शुरू की और कुछ ही देर में तीनों बच्चों के शव पानी से बाहर निकाले गए।
अस्पताल में मिली दुखद पुष्टि
बच्चों को अंबागढ़ चौकी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शवों को मरच्युरी में रखवाया गया और अगले दिन पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
गांव में पसरा मातम, अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
सोमवार को एक साथ निकली तीन अर्थियां, और एक ही चिता पर तीन मासूमों का अंतिम संस्कार किया गया। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर ग्रामीण की रूह को झकझोर दिया। मातम का ऐसा आलम था कि गांव की हर गली, हर आंगन में सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही थीं।
अंतिम यात्रा में ग्राम पंचायत, स्कूल शिक्षक, सामाजिक प्रतिनिधि, एवं सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। हर किसी की आंखें नम थीं, और लोग यही कह रहे थे— काश बच्चों ने तालाब की ओर रुख न किया होता।
क्या कहना है ग्रामीणों का?
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव के सभी तालाबों की घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटना दोबारा न हो। साथ ही स्कूलों में बच्चों को पानी से जुड़े सुरक्षा उपायों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने की मांग भी उठी है।
छछानपाहरी की यह घटना एक सामूहिक त्रासदी बन गई है, जिसने गांव ही नहीं, पूरे अंचल को हिला दिया है। तीन दोस्तों का यूं एक साथ जाना, एक ऐसा जख्म छोड़ गया है जिसे समय भी शायद ही भर पाए।
ईश्वर इन मासूम आत्माओं को शांति दे, और परिजनों को यह गहन पीड़ा सहन करने की शक्ति।




