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डॉ. बिजेंन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “बच्चों में करें सद्गुणों का विकास”

रानीतराई :- मनुष्य विधाता की सर्वश्रेष्ठ रचना है। वह विधाता की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति भी है। हमारी संस्कृति में मनुष्य शरीर की काफी महिमा गायी गयी है। स्वस्थ जीवन का महत्व भी बताया गया है । परन्तु मौजूदा परिवेश में स्थिति विपरित प्रतीत होता है। वर्तमान समय में इंसानी जिन्दगी एवं समाजिक परिवेश में कटुता बढ़ रही है। परिवार में संस्कार व मूल्य भी तेजी से घट रही है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक आत्मीय संबंधों के मूल्य का तेजी से क्षरण होने लगा है। समाज में हिंसा प्रतिहिंसा वैचारिक कलुषता पनपने लगा है जिसका प्रभाव भावी पीढ़ीयों पर भी पड़ने लगा है।
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