मधोता-खैरगुड़ा में आस्था के साथ मनाया गया भादम जतरा
ग्राम देवी-देवताओं की पूजा कर फसलों को कीट प्रकोप से बचाने और ग्रामीणों को रोग-व्याधियों से मुक्त रखने की मांगी गई कामना
बस्तर(मनोज ठाकुर)। ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी और ग्राम देवी-देवताओं से जुड़ी लोकपरंपराओं का आज भी विशेष महत्व है। इसी आस्था और परंपरा का निर्वहन करते हुए मधोता एवं खैरगुड़ा क्षेत्र में पारंपरिक भादम जतरा श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। ग्रामीण मान्यता के अनुसार भादम जतरा गांव में सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि के साथ खेतों में खड़ी फसल को कीट प्रकोप से बचाने तथा ग्रामीणों को विभिन्न रोग-व्याधियों से सुरक्षित रखने की कामना के लिए मनाया जाता है।
भादम जतरा की शुरुआत शुक्रवार को मधोता स्थित भैरम बाबा मंदिर में हुई। यहां ग्राम देवी तपेश्वरी माता एवं भैरम बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। ग्राम माटी पुजारी और सिरहा के मार्गदर्शन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देवी-देवताओं की आराधना की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में अच्छी फसल, गांव में सुख-शांति तथा परिवारों की खुशहाली के लिए देवी-देवताओं से आशीर्वाद मांगा।
ग्रामीणों के अनुसार खेती के समय फसलों में कीट प्रकोप सहित विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे समय में ग्रामीण अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप ग्राम देवी-देवताओं की शरण में जाकर फसल की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन की कामना करते हैं। इसी लोकविश्वास के तहत बोहरानी भादम जतरा की परंपरा निभाई जाती है।
खैरगुड़ा के बड़े घर में भी निभाई गई परंपरा
मधोता में जतरा सम्पन्न होने के बाद मंगलवार को खैरगुड़ा के बड़े घर घाटीमुंडिन परदेशीन माता गुड़ी में भादम जतरा मनाया गया। ग्राम माता पुजारी, सिरहा और ग्राम के देवी-देवताओं की उपस्थिति में पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ग्राम की रक्षा, परिवारों के निरोगी जीवन और खेतों में अच्छी पैदावार के लिए प्रार्थना की।
इस दौरान ग्रामीणों में अपनी पुरानी परंपरा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। बुजुर्गों के अनुसार भादम जतरा केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि गांव के लोगों को एकजुट करने वाली परंपरा भी है। इसमें ग्रामीण सामूहिक रूप से ग्राम देवी-देवताओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं और आने वाले समय में गांव की खुशहाली की कामना करते हैं।
बस्तर की ग्रामीण संस्कृति में प्रकृति, खेती और देवी-देवताओं के प्रति आस्था का गहरा संबंध रहा है। मधोता और खैरगुड़ा में सम्पन्न भादम जतरा इसी लोकपरंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसे ग्रामीण आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।






