चरोदा/ आयोडीन अल्पता विकार कार्यक्रम यानि आयोडीन प्रत्येक व्यक्ति के लिए कितना आवश्यक है आयोडीन की कमी से क्या रोग होते है इसके प्रति जागरूकता लाने भारत सरकार व छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण विभाग(स्वास्थ्य) ने जन जागरूकता अभियान चलाकर स्कूलों मे अध्ययन कर रहे छात्र छात्रोओ को जागरूक किया।
शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम चरोदा भिलाई 3के बीईईटीओ व स्वास्थ्य सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि आयोडीन शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है यह प्राकृत रूप से खादय पदार्थ मे मिलता से लेकिन अपदा ,बाढ ,के कारणों से यह कम हो रहा है जिसके कारण नमक मे इसकी मात्रा को मिलकर सेवन करने से इसकी कमी से बचा जा सकता है।
खंड चिकित्सा अधिकारी डा आशीष शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन एक व्यक्ति को 150माइक्रोम आयोडीन की आवश्यकता होती है आयोडीन की कमी से घेंघा रोग,महिलाओं मे गर्भपात,युवाओं मे उर्जा की कमी ओर जल्दी थकावट आती है इस वजह से 1962मे राष्ट्रीय घेंघा रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया ओर 1988मे खादय अपमिश्रण अधिनियम मे संसोधन कर उत्पादन स्तर पर नमक मे आयोडीन की मात्रा 30पीपीएम ओर फुटकर बिक्री पर 15पीपीएम से कम नही होने का नियम बनाया है डा.आशीष शर्मा कहते है अभी भी इसके लिए जागरूकता जरूरी है इसलिए भारत सरकार ने इस अभियान का नाम 1992 मे आयोडीन अल्पता विकार कार्यक्रम कर दिया है ताकि हर व्यक्ति को इसके कमी से बचाया जाए।
इस कार्यक्रम मे एल एच व्ही श्रीमती आर विश्वास ओर श्रीमती ए दत्ता ने बताया कि यद्यपि घेंघा रोग अब देखने कम मिलता है लेकिन आयोडीन कमी के विकार के रोग बहुतायत है अपने आप गर्भपात ,उर्जा की कमी ,मानसिक विकलांग ओर आयोडीन डिसआडर अभी भी समुदाय में मिलते है लोग सात पीपीएच वाला सादा नमक उपयोग करते है।





