मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में गहराया अंतर्विरोध: जिलाध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले के रवैये के खिलाफ हसदेव मंडल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा
अंदरूनी बैठक में फूटा जमीनी भाजपाइयों का दर्द; कहा— “जिलाध्यक्ष मस्त, कार्यकर्ता त्रस्त”, अनदेखी जारी रही तो संगठन को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिला अंतर्गत आने वाले हसदेव मंडल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह से सड़कों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। लंबे समय से जिला नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट चल रहे जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा है। भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले के कथित मनमाने रवैये और तानाशाही पूर्ण व्यवहार से परेशान होकर हसदेव मंडल के कार्यकर्ताओं ने एक आपात बैठक कर जिला नेतृत्व के खिलाफ तीखी नाराजगी व्यक्त की है। क्षेत्र के राजनीतिक माहौल में इस समय “जिलाध्यक्ष मस्त और कार्यकर्ता त्रस्त” का नारा तेजी से गूंज रहा है।
कार्यकर्ताओं की बंद कमरे में हुई लंबी चर्चा: खुलकर सामने आई उपेक्षा की बातें
श्रीमती चंपा देवी पावले की कार्यप्रणाली को लेकर हसदेव मंडल के वरिष्ठ, सक्रिय और आधार स्तंभ माने जाने वाले कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा की। कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस बातचीत में मुख्य रूप से जिला संगठन के निर्णयों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए। कार्यकर्ताओं ने आपस में चर्चा करते हुए कहा कि जब राज्य में विपरीत परिस्थितियां थीं, तब जिन कार्यकर्ताओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए, लाठियां खाकर और केस झेलकर पार्टी को जिले में मजबूत किया, आज उन्हीं निष्ठावान भाजपाइयों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है।
कार्यकर्ताओं की बातचीत के दौरान जिला अध्यक्ष पर गंभीर आरोप सामने आए:
- निर्णयों में मनमानी: भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले द्वारा स्थानीय स्तर पर या मंडलों में कोई भी निर्णय लेते समय स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ताओं से कोई राय-मशविरा नहीं किया जा रहा है।
- पसंदीदा लोगों को तवज्जो: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिला अध्यक्ष केवल अपने कुछ चुनिंदा और पसंदीदा लोगों को ही हर जगह आगे बढ़ा रही हैं, जिससे सालों से पार्टी के लिए पसीना बहाने वाले कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
- संवादहीनता का माहौल: कार्यकर्ताओं ने दुख जताते हुए कहा कि जिला नेतृत्व और आम कार्यकर्ताओं के बीच संवाद पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। जिला अध्यक्ष के समक्ष अपनी बात रखने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे संगठन की रीढ़ माने जाने वाले कार्यकर्ताओं में भारी निराशा है।
“हम पार्टी के विरोधी नहीं, व्यवस्था के खिलाफ हैं” — कार्यकर्ताओं का दोटूक
हसदेव मंडल के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और शीर्ष नेतृत्व के विरोधी नहीं हैं। वे आज भी पार्टी के सच्चे सिपाही हैं, लेकिन जिले में जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले द्वारा जिस तरह से तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है, वे उस गलत व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते जिला नेतृत्व ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं दिया, तो आने वाले समय में संगठन को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
प्रदेश आलाकमान तक शिकायत भेजने की तैयारी, खलबली मची
हसदेव मंडल से जिला अध्यक्ष के खिलाफ उठी विरोध की इस चिंगारी ने जिला भाजपा संगठन के भीतर खलबली मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, नाराज कार्यकर्ताओं का यह गुट अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले के इस पूरे मनमाने रवैये, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जिले के वर्तमान सांगठनिक हालातों की एक विस्तृत लिखित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस शिकायत पत्र को जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और पार्टी के वरिष्ठ प्रादेशिक नेताओं तक पहुंचाकर निष्पक्ष जांच और कड़े कदम उठाने की मांग की जाएगी।
विपक्षी दलों की टिकी नजरें, राजनीतिक हलचल तेज
सत्ताधारी दल के भीतर इस तरह सरेआम उपजे असंतोष के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। हसदेव मंडल के भाजपाइयों का जिला अध्यक्ष के खिलाफ यह रुख देखकर विपक्ष भी चुटकियां ले रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस अंदरूनी कलह को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो हसदेव मंडल की यह नाराजगी जिले के अन्य मंडलों में भी फैल सकती है, जिससे जिला नेतृत्व पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा।
मुख्य सूचना बिंदु (अखबार के बॉक्स आइटम के लिए):
- असंतोष का मुख्य केंद्र: जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले की कार्यशैली, वरिष्ठ व जमीनी कार्यकर्ताओं की निरंतर उपेक्षा और मनमाने फैसले।
- कार्यकर्ताओं का दर्द: संघर्ष के दिनों के साथियों को भुलाकर केवल चहेतों को मिल रही तवज्जो।
- कार्यकर्ताओं की रणनीति: एकजुट होकर पूरे मामले की लिखित शिकायत प्रदेश संगठन और आलाकमान के पास भेजने का निर्णय।
- चेतावनी: संवादहीनता और तानाशाही न रुकी, तो धरातल पर कमजोर हो सकता है संगठन।
निष्कर्ष:
MCB जिले के हसदेव मंडल से शुरू हुआ यह आंतरिक विवाद अब भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब सारा दारोमदार प्रदेश संगठन पर टिक गया है कि वे समय रहते जिला अध्यक्ष श्रीमती चंपा देवी पावले और नाराज कार्यकर्ताओं के बीच की इस खाई को कैसे पाटते हैं और संगठन में अनुशासन कैसे बहाल रखते हैं।