भाजपा सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग बना भ्रष्टाचार और लीपापोती का केंद्र, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की चुप्पी पर उठे सवाल: गुलाब कमरो
मनेन्द्रगढ़। प्रदेश की भाजपा सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का गढ़ बन चुका है। विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की नाक के नीचे गरीब बेटियों के हक पर डाका डाला जा रहा है, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है। यह गंभीर आरोप भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता गुलाब कमरो ने लगाए हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में नकली मंगलसूत्र बांटे जाने के हालिया मामले को लेकर साय सरकार और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर प्रदेश की गरीब बेटियों के सम्मान और उनके स्वाभिमान से खिलवाड़ है।
जांच में शिकायत सही, फिर भी कार्रवाई से बच रहीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने विभागीय कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में विभाग के भीतर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए बकायदा एक जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायत को प्रथम दृष्टया (Prima Facie) बिल्कुल सही पाया था।
कमरो ने पूछा कि अगर जांच समिति ने भ्रष्टाचार की पुष्टि कर दी थी, तो विभाग की मुखिया होने के नाते मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अब तक दोषियों पर गाज क्यों नहीं गिराई? आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जो भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है?
”एक तरफ भाजपा सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी पवित्र योजना में बेटियों को नकली मंगलसूत्र थमाकर उनके साथ धोखा किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट सही होने के बाद भी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की चुप्पी यह साबित करती है कि ऊपर से नीचे तक सब मिले हुए हैं।”
— गुलाब कमरो, पूर्व विधायक
बिना निष्पक्ष जांच के विभाग दे रहा सफाई
नकली मंगलसूत्र वितरण के मामले पर नाराजगी जताते हुए गुलाब कमरो ने कहा कि जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, विभाग बिना किसी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के आनन-फानन में अपनी सफाई पेश करने में जुट गया। बिना जांच के ही विभाग द्वारा क्लीन चिट दिया जाना यह साफ करता है कि मामले को दबाने और बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने सरकार और विभागीय मंत्री के सामने तीन मुख्य सवाल खड़े किए हैं:
- सवाल 1: जब वित्तीय अनियमितता की जांच रिपोर्ट सही पाई गई थी, तो अब तक दोषियों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई और विभागीय कार्रवाई क्यों रोकी गई?
- सवाल 2: अगर शिकायतें सही थीं, तो इस महाघोटाले के पीछे असली मास्टरमाइंड और दोषी कौन हैं? उनके नाम उजागर क्यों नहीं किए जा रहे?
- सवाल 3: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत होने वाली खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं रखी जा रही है? टेंडर से लेकर सामान वितरण तक का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं है?
उच्चस्तरीय जांच और इस्तीफे की मांग
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मांग की है कि प्रदेश की गरीब बेटियों के सम्मान और सरकारी खजाने की लूट को रोकने के लिए ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े इस मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करती हैं, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी और बेटियों के न्याय के लिए सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।