स्व-सहायता समूह से मिली ताकत, स्वरोजगार से तेजप्रभा सिंह की हर माह 10 हजार रुपये की आमदनी
समूह से जुड़कर मिली आत्मनिर्भरता की नई राह
तेजप्रभा सिंह हरियाली महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं तो उन्हें बचत और सामूहिक प्रयास के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह से प्राप्त सीआईएफ राशि 60,000 रुपये ने उनके लिए स्वरोजगार की राह आसान की। इसके साथ ही उन्होंने 3,00,000 रुपये का बैंक ऋण प्राप्त किया। उपलब्ध आर्थिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए तेजप्रभा ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
50 हजार रुपये की खुद की पूंजी से शुरू किया व्यवसाय
तेजप्रभा सिंह ने अपने व्यवसाय में 50,000 रुपये की स्वयं की पूंजी लगाई। उन्होंने किराना एवं मनिहारी सामग्री के साथ सिलाई का कार्य शुरू किया। एक ही स्थान पर लोगों की रोजमर्रा की जरूरत का सामान उपलब्ध कराने के साथ सिलाई की सुविधा मिलने से धीरे-धीरे उनकी दुकान की पहचान आसपास के क्षेत्र में बनने लगी।
उनका व्यवसाय ग्रामीण परिवेश की जरूरतों के अनुरूप है। किराना सामग्री से लेकर मनिहारी का सामान और सिलाई की सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम हुई। तेजप्रभा सिंह स्वयं व्यवसाय का संचालन करते हुए अपने समय और मेहनत का पूरा उपयोग कर रही हैं।
मेहनत बनी सफलता की कुंजी, हर महीने 10 हजार रुपये की आय’
तेजप्रभा सिंह बताती हैं कि शुरुआत में व्यवसाय को स्थापित करने के लिए मेहनत और धैर्य की जरूरत थी। लेकिन समूह से मिले सहयोग, बैंक ऋण और स्वयं की पूंजी के सही उपयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। आज उनके व्यवसाय से उन्हें लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है।
इस आय से वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने तथा आय में वृद्धि करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की बनी प्रेरक मिसाल
तेजप्रभा सिंह की कहानी बताती है कि यदि महिलाओं को आर्थिक सहयोग, सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर मिले तो वे अपने परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। हरियाली महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने जिस तरह सीआईएफ राशि, बैंक ऋण और अपनी पूंजी का उपयोग कर स्वरोजगार खड़ा किया है, वह अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी है।
आज तेजप्रभा सिंह के लिए यह दुकान सिर्फ आय का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सम्मान की पहचान बन चुकी है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि छोटे प्रयास और निरंतर मेहनत मिलकर बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं।
