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4 साल पुरानी पलक की गांठ का 220 बिस्तर सिविल अस्पताल में सफल ऑपरेशन 19 वर्षीय कॉलेज छात्र को मिली वर्षों पुरानी समस्या से राहत; जांच के लिए लैब भेजा गया ऊतक

4 साल पुरानी पलक की गांठ का 220 बिस्तर सिविल अस्पताल में सफल ऑपरेशन

19 वर्षीय कॉलेज छात्र को मिली वर्षों पुरानी समस्या से राहत; जांच के लिए लैब भेजा गया ऊतक

मनेन्द्रगढ़ 

मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय सिविल चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग ने एक बार फिर उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा का उदाहरण पेश किया है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक 19 वर्षीय युवक की दाहिनी आंख की निचली पलक में पिछले चार वर्षों से बनी गांठ का सफलतापूर्वक शल्य-उच्छेदन (ऑपरेशन) किया। 30 जुलाई को स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत की गई यह शल्यक्रिया पूरी तरह से जटिलता-मुक्त रही।

चार वर्षों से परेशान था छात्र, समय के साथ बढ़ रहा था आकार

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम देवाडांड निवासी 19 वर्षीय राज कुमार वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित आदिवासी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। पिछले लगभग चार वर्षों से उनकी दाहिनी आंख की निचली पलक में एक गांठ बनी हुई थी, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़कर उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान कर रही थी। छात्र ने पूर्व में भी नजदीकी अस्पतालों में इलाज कराया था, लेकिन कोई अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

ओपीडी जांच के बाद लिया गया शल्यक्रिया का निर्णय

​लगभग एक सप्ताह पूर्व राज कुमार इलाज के लिए 220 बिस्तर सिविल अस्पताल की नेत्र ओपीडी पहुँचे। यहाँ विस्तृत डॉक्टरी परीक्षण के दौरान दाहिनी आंख की निचली पलक में गांठ की पुष्टि हुई। चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद नेत्र विशेषज्ञों ने गांठ को शल्यक्रिया द्वारा निकालने तथा उसकी हिस्टोपैथोलॉजिकल (Histopathological) जांच कराने का निर्णय लिया।

​ऑपरेशन से पहले मरीज की दृष्टि क्षमता, पलकों की गतिविधि और आवश्यक रक्त जांचें की गईं, जो पूरी तरह सामान्य पाई गईं। तत्पश्चात 30 जुलाई को डॉक्टरों की टीम ने ‘Right Lower Eyelid Mass Excision’ की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।

बायोप्सी रिपोर्ट से स्पष्ट होगी गांठ की प्रकृति

​शल्यक्रिया के दौरान निकाले गए ऊतक (टिश्यू) के नमूने को 10 प्रतिशत फॉर्मालिन घोल में सुरक्षित कर हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण (HPE) के लिए पैथोलॉजी विभाग भेज दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गांठ के वास्तविक कारण और उसकी प्रकृति (बायोप्सी निदान) का पूरी तरह से पता चल सकेगा, जिसके आधार पर आगे की देखभाल तय की जाएगी।

विशेषज्ञों की टीम का सराहनीय योगदान

​इस सफल ऑपरेशन में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिर्रे ने ऑपरेटिंग सर्जन के रूप में मुख्य भूमिका निभाई। शल्यक्रिया के दौरान स्टाफ नर्स रीता मिश्रा एवं नेत्र सहायक रीमा सिंह ने उनका महत्वपूर्ण सहयोग किया।

​यह शल्यक्रिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन तथा अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के संरक्षण एवं सहयोग से संपन्न हुई।

स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सुविधाओं से मिली राहत

​इस सफल इलाज की सबसे खास बात यह रही कि दूर-दराज के ग्रामीण अंचल से आकर पढ़ाई कर रहे इस छात्र को बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। मनेन्द्रगढ़ के सिविल अस्पताल में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों और नि:शुल्क सुविधाओं के चलते छात्र को वर्षों पुरानी पीड़ा से मुक्ति मिल सकी।

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