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साहित्य समिति ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा – अर्चना कर ,मनाया प्राकृतिक हरीतिमा का पर्व “हरेली”

* “हरेली” अच्छी फसल‌ की कामना से मनाए जाने वाला लोक पर्व है – मधुसूदन यादव…
* साहित्य समिति ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा – अर्चना कर ,मनाया प्राकृतिक हरीतिमा का पर्व हरेली…
* नीम पत्तियों वाले हार के स्वागत से अभिभूत हुए अतिथि, वंदे मातरम की गान से देश भक्ति का हुआ संचार…

राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का प्रथम लोक पर्व हरेली छत्तीसगढ़ महतारी की पूजन- अर्चन कर मनाया गया।

नगर निगम परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर मधुसूदन यादव ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा नीम पत्तियों के हार व गुरहा चीला चढ़ा कर की और सबको छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक पर्व हरेली की बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।

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उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों द्वारा अपने धान फसल की बेहतरी के लिए मनाया जाने वाला यह पर्व हमें पर्यावरण जागरण का संदेश आदि काल से देते आया है। इस दिन किसान अपने कृषि औजारों की पूजन तो करते हैं साथ ही कृषि कार्यों में साथ देने वाले गो- धन के प्रति सजग रहते हुए उन्हें अंडा के पान में लोंदी खिलाते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश‌ वैष्णव समाज के प्रांताध्यक्ष दाऊ सुरेंद्र वैष्णव ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा कर कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ अंचल धान का कटोरा कहलाता है। यह धान का कटोरा हरदम भरा रहे इसलिए यहां कि किसान मजदूर सौजिया चरवाहा सभी खुशी-खुशी हरेली का त्योहार मनाते हैं।

“जन-गण-मन एवं वंदे मातरम की गूंज”
इस दौरान छत्तीसगढ़ महतारी प्रतिमा में तिरंगा चढ़ाकर उपस्थितो द्वारा दौरान राष्ट्र गीत जन- गण-मन व “वंदे मातरम” का गान किया गया जिससे हरेली पर्व की खुशियों के साथ देश भक्ति की भावना गूंज उठी।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रुप में उपस्थित वरिष्ठ समाज सेवी महिला श्रीमती शारदा तिवारी, साधना तिवारी, डॉ चेतन साहू,नगर निगम सभापति पारस वर्मा, आयुक्त जी आर मरकाम,चेयर मेन राजा माखीजा,आलोक श्रोती, वरिष्ठ पार्षद शिव वर्मा, सुश्री मणि भास्कर गुप्ता ,मनोहर यादव का स्वागत साहित्य समिति द्वारा नीम पत्तियों के हार से किया गया।

इस अनोखे स्वागत से अभिभूत वरिष्ठ समाजसेवी शारदा तिवारी ने कहा कि हरेली तिहार हरियर – फरियर रहने का त्योहार है। इस दिन राउत बंधु लोगों के घरों में जाकर उनके सुखी जीवन व उन्हें बूरी बलाओं से बचाने नीम पत्तियां खोंसते है, और दान- दक्षिणा पाते हैं।

“बैक्टीरिया नाशक और औषधीय गुण वाले होते हैं नीम”
हरेली पर्व के उपलक्ष्य में निगम परिसर में डाक्टर चेतन साहू के हाथों पारस पीपल व कचनार पौध का रोपण किया गया। उन्होंने नीम के औषधीय गुण के संबंध में बताया कि हमारे पुराने लोग काफी अनुभवी थे जो नीम के गुणों के बारे में जानते थे और इसे बैक्टीरिया नाशक मानते हुए इसका उपयोग करते थे।

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उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में वितरण करने वाले सूक्ष्म जीवाणु इसके संपर्क में आ कर नष्ट हो जाते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट एंटी बैक्टेरियल प्रापर्टी नीम स्कीन के लिए व डायबेटिक के लिए भी काफी फायदेमंद है। स्वदेशी जागरण मंच की साधना तिवारी ने बताया कि नीम पत्तियों के सेवन से न केवल खाज- खूजली दूर हो जाती है इन वायरल मेंट को दूषित होने से रोकता है।

हरेली पर्व के उपलक्ष्य में साहित्य समिति द्वारा साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हरेली त्योहार की विशेषता बताते हैं समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा “अकाट्य” ने कहा कि हरेली का त्योहार धरती को हरा- भरा रखने के लिए आदि काल से सीख देते आया है। उन्होंने हरेली पर्व पर नीम पत्तियों के औषधीय उपयोग के संदर्भ में कहा कि जब से वे नीम पत्तियों का हार पहन कर बैठे हुए थे अभी तक कोई घुनघुटी मच्छर उसके पास नहीं फटका।

“हरेली त्योहार बनाम भगवान शनि जयंती”
समिति के संरक्षक व छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा “अमात्य” ने कहा कि हरेली त्योहार प्रकारांतर से भगवान शनि जयंती का पर्व है। हमारे कोई भी पर्व एकांगी नहीं होते। किसान इस दिन जो लोहा लगे कृषि उपकरणों को पूजा करते हैं उसमें शनि देवता का वास होता है।

यही वजह है कि किसान भाई ,हल , रापा कुदाली, लोहार बंधु घन, हथौड़े, निहाई ,बढई जन अपने आरी बसुला पटासी को पूजते हैं और उसमें लोह तत्व वाले गुरहा चीला चढ़ाकर भगवान से अच्छी फसलों व अपने घर परिवार की खुशहाली का प्रार्थना करते हैं।

कथाकार मानसिंह “मौलिक” ने हरेली को पर्यावरण संरक्षण का पर्व बताया वहीं पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी ने छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को रागात्मकता देने वाला तथा राकेश इंदु भूषण ठाकुर ने हरेली को प्रकृति के विविध रुपो में आने वाला हरीतिमा का पर्व बताया।

इस दौरान व्यंग्यकार /कवि गिरीश ठक्कर ‘स्वर्गीय” लेखक रोशन साहू मोखला, कवयित्री करिश्मा श्रीवास्तव, कवि आनंद राम सार्वा “अनंत”, चुरामन साहू “चैतन्य”, बलराम सिन्हा “रब” आदि ने हरेली पर्व के संबंध में अपने मंतव्य रखें।अंत में उपस्थितो का आभार प्रदर्शन संगठन सचिव पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी द्वारा किया गया। उक्ताशय की जानकारी सचिव मानसिंह मौलिक द्वारा दी गई। 9691318653

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