मकान कर वसूली पर भड़की सियासत: MCB में पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने खोला मोर्चा, कहा— ‘महंगाई के दौर में ग्रामीणों पर नया डाका’
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB):
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के ग्रामीण इलाकों में अब 1200 रुपये वार्षिक मकान कर (संपत्ति कर) वसूलने के जिला पंचायत के फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में बड़ा भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां पंचायत सचिवों पर वसूली पूरी करने का कड़ा प्रशासनिक दबाव है, वहीं दूसरी तरफ इस तुगलकी फरमान के खिलाफ विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार और जिला प्रशासन की मंशा पर कड़े सवाल खड़े करते हुए इस फैसले को पूरी तरह जनविरोधी करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जिला पंचायत कार्यालय द्वारा जारी ताजा निर्देशानुसार जिले की तीनों जनपद पंचायतों (मनेंद्रगढ़, खड़गवां और भरतपुर) के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रत्येक मकान से 100 रुपये प्रतिमाह यानी 1,200 रुपये वार्षिक की दर से भवन/मकान कर वसूलने का फरमान जारी किया गया है।
इतना ही नहीं, इस राजस्व वसूली को शत-प्रतिशत पूरा कराने के लिए प्रशासन ने दंडात्मक रुख अपनाया है। जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि किसी पंचायत क्षेत्र में कर वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद से पूरे मैदानी अमले में हड़कंप मचा हुआ है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो का तीखा वार
प्रशासनिक हठधर्मिता और वसूली के इस कड़े निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा की डबल इंजन सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जनता पहले से ही कमरतोड़ महंगाई, अनाप-शनाप बिजली बिलों और रोजगार के अभाव से त्रस्त है, ऐसे में यह नया टैक्स ग्रामीणों की जेब खाली करने का जरिया मात्र है।
“क्या डबल इंजन सरकार अब महंगाई और बढ़े हुए बिजली बिल के बाद ग्रामीणों से संपत्ति कर वसूलकर उनकी जेब पर एक और हमला करने जा रही है? जब जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है, तब सरकार राहत देने के बजाय नया कर थोपने में लगी है। गांव का गरीब, किसान, मजदूर और राशन कार्डधारी परिवार आखिर कब तक नए-नए करों और बढ़ते खर्चों का बोझ उठाएगा?”
— गुलाब कमरो, पूर्व विधायक
ग्रामीणों और कर्मचारियों में गहराता असंतोष
- छोटे परिवारों के बजट पर सीधी चोट: ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले अधिकांश परिवार मजदूरी, छोटे-मोटे कृषि कार्यों या शासकीय राशन पर निर्भर हैं। हर महीने 100 रुपये का अतिरिक्त कर उन परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक झटका है, जो पहले से ही आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं।
- कर्मचारियों पर अनैतिक दबाव: ग्राम पंचायत सचिवों और जमीनी अमले का कहना है कि गांवों में लोगों के पास रोजगार नहीं है, ऐसे में जबरन वसूली करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। वेतन रोकने की चेतावनी से कर्मचारियों में भारी मानसिक तनाव और आक्रोश का माहौल है।
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव, कर की भरमार: स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांवों में सड़क, पानी, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी बदहाल हैं। विकास कार्यों के अभाव के बीच जबरन टैक्स वसूलना न्यायसंगत नहीं है।
’आर्थिक प्रहार बंद करे सरकार’ — सीधे आंदोलन की चेतावनी
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां जनहितैषी न होकर केवल राजस्व बटोरने और आम जनता को प्रताड़ित करने तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
“महंगाई की मार, ऊपर से नया कर! ग्रामीण जनता पर आर्थिक प्रहार बंद करो।”
उन्होंने संकेत दिया कि यदि जिला प्रशासन और सरकार ने इस जनविरोधी तुगलकी फरमान को तत्काल वापस नहीं लिया, तो इसके खिलाफ ग्रामीण स्तर पर व्यापक जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा और जनता के हक की लड़ाई सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक लड़ी जाएगी।