MCB में कलेक्टर कार्यालय के शुभारंभ पर सियासी बवाल: पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रशासन और सत्ता पक्ष पर दागे तीखे सवाल
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): नवीन जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में कलेक्टर कार्यालय भवन निर्माण कार्य के शुभारंभ को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सत्ता पक्ष की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस पूरे आयोजन की प्रक्रिया, स्थान चयन और जनभावनाओं की अनदेखी पर तीखा प्रहार किया है।
बिना आमंत्रण और प्रोटोकॉल के आयोजन का आरोप
प्रशासनिक जल्दबाजी पर सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने एक विस्तृत प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि जिला प्रशासन और विभागीय मंत्रियों द्वारा बिना किसी पूर्व योजना के आनन-फानन में इतने ऐतिहासिक कार्यक्रम की नींव रखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण आयोजन के लिए न तो कोई तय प्रोटोकॉल अपनाया गया और न ही औपचारिक आमंत्रण पत्र जारी किए गए।
गुलाब कमरो का सीधा बयान:
“आज मंत्री जी द्वारा आनन-फानन में कलेक्टर कार्यालय भवन निर्माण कार्य का शुभारंभ किया जा रहा है, लेकिन इतने महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए न तो कोई उचित प्रोटोकॉल बनाया गया, न ही आमंत्रण पत्र जारी किए गए। आखिर विभाग और प्रशासन को इतनी हड़बड़ी क्यों है, जब न पर्याप्त तैयारी थी, न जनप्रतिनिधियों से चर्चा और न ही जनता की भागीदारी सुनिश्चित की गई?”
जनप्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों का अपमान
उन्होंने आगे कहा कि MCB जिले की स्थापना किसी एक दिन का निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष है। जिले के गठन के लिए अपनी जमीनी लड़ाई लड़ने वाले क्षेत्रीय सांसद, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा उन सम्मानित नागरिकों को इस कार्यक्रम में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिन्होंने जिला निर्माण की मांग को लेकर लाठियां खाईं, लंबे आंदोलन किए, धरने दिए और जेल तक गए। ऐतिहासिक महत्व के इस अवसर पर संघर्ष करने वालों को दरकिनार करना लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला उल्लंघन है।
स्थान चयन में जनभावनाओं और क्षेत्रीय सुगमता की अनदेखी
दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के हक पर डाका
कलेक्टर कार्यालय के स्थान चयन को लेकर प्रशासन को घेरते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने जनभावनाओं और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूर्व में भी कई बार शासन-प्रशासन को लिखित पत्र भेजे थे।
स्थान चयन पर पूर्व विधायक का पक्ष:
“हमने हमेशा मांग की थी कि कलेक्टर कार्यालय का स्थान ऐसा चयन किया जाए जो दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों—जैसे जनकपुर, कोटाडोल और भरतपुर क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए सुगम हो और राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हो। लेकिन आम जनता की सुगमता और हमारे सुझावों की सरासर अनदेखी कर बंद कमरों में जल्दबाजी में निर्णय थोप दिया गया।”
उन्होंने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से जनकपुर, कोटाडोल और भरतपुर के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि कार्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप और मध्य क्षेत्र में बनता, तो सभी के लिए आवागमन आसान होता।
लोकतांत्रिक मूल्यों और संघर्ष के सम्मान की मांग
जनता के पसीने का परिणाम है MCB जिला
पूर्व विधायक ने कहा कि MCB जिला किसी व्यक्तिगत नेता या वर्तमान प्रशासन का तोहफा नहीं है, बल्कि यह यहां की जनता के संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास का परिणाम है।
निष्कर्ष रूप में उनका बयान:
“MCB जिला यहां की जनता की भावनाओं और संघर्ष का परिणाम है। ऐसे ऐतिहासिक समय में लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए था और जिले के निर्माण में अपना सर्वस्व देने वाले सभी लोगों को उचित सम्मान मिलना चाहिए था, जो कि इस कार्यक्रम में कहीं दिखाई नहीं दिया।”
प्रशासन की इस कार्यशैली और जल्दबाज़ी में किए गए शुभारंभ को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, आंदोलनकारियों और आम नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।