MCB संयुक्त कलेक्टर कार्यालय भूमिपूजन पर आर-पार की जंग: मंत्री जायसवाल और पूर्व विधायक कमरो के बीच जुबानी तीर तेज
मुख्य बिंदु:
- भवन निर्माण के स्थान और प्रशासनिक प्रोटोकॉल को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने बोला सीधा हमला।
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का मंच से पलटवार— “जिन्हें विकास नहीं दिखता, वे लगाएं पावर वाला चश्मा।”
- कमरो का तंज— “स्वास्थ्य मंत्री जी, चश्मे की जरूरत आपको है; कांग्रेस ने जिला न बनाया होता तो श्रेय कैसे लेते?”
- दूरस्थ वनांचल ग्रामीणों की समस्याओं और जिला निर्माण के संघर्ष को लेकर राजनीतिक पारा गरमाया।
प्रशासनिक व्यवस्था, प्रोटोकॉल और स्थान चयन पर उठे गंभीर सवाल
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में नए संयुक्त जिला कलेक्टर कार्यालय भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ होते ही क्षेत्रीय राजनीति उफान पर आ गई है। भूमिपूजन कार्यक्रम के आयोजन के तरीके, जनप्रतिनिधियों की कथित उपेक्षा और भवन के स्थान चयन को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रदेश सरकार तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रेस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कलेक्टर कार्यालय जैसे अति-महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रशासनिक केंद्र के निर्माण का शुभारंभ आनन-फानन में निपटाया गया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन के लिए न तो कोई तय प्रोटोकॉल अपनाया गया, न ही औपचारिक आमंत्रण पत्र बांटे गए। कमरो ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि MCB जिला बनाने की मांग को लेकर वर्षों तक संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों, लाठियां खाने वाले नागरिकों, जेल जाने वाले सत्याग्रहियों और क्षेत्र की सांसद तक को इस ऐतिहासिक क्षण से दूर रखा गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं का सीधा उल्लंघन है।
इसके साथ ही उन्होंने भवन के निर्माण स्थल (जेल बिल्डिंग रोड) पर सवाल खड़े किए। कमरो का कहना था कि जनकपुर, कोटाडोल और भरतपुर जैसे अत्यंत दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से आने वाले आदिवासियों और ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कार्यालय किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि जनभावनाओं और लिखित सुझावों को दरकिनार कर जल्दबाजी में फैसला थोपा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री का मंच से तीखा प्रहार: “विकास देखने के लिए नजरिया बदलिए”
दूसरी ओर, भूमिपूजन कार्यक्रम के मुख्य मंच से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विपक्षी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मंत्री जायसवाल ने पिछली कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में केवल कलेक्टर और एसपी के पद सृजित कर दिए गए थे, लेकिन दफ्तर चलाने के लिए न्यूनतम प्रशासनिक अमला (बाबू) तक मुहैया नहीं कराया गया था।
स्थान चयन के विवाद पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि जो ग्रामीण जनकपुर और कोटाडोल से सफर तय करके मनेन्द्रगढ़ तक आ सकते हैं, उनके लिए 5 किलोमीटर और आगे जाना कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक रोडमैप स्पष्ट करते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिला पंचायत कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध कराई गई उपयुक्त भूमि पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP), खनिज और परिवहन विभाग जैसे प्रमुख कार्यालयों का एकीकृत परिसर तैयार होगा।
क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि अकेले भरतपुर क्षेत्र में लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। विपक्ष पर चुटकी लेते हुए मंत्री ने कहा कि जिन्हें क्षेत्र में हो रहा चौमुखी विकास नजर नहीं आ रहा है, उन्हें अपनी नजरें साफ करने के लिए “पावर वाला चश्मा” लगा लेना चाहिए।
गुलाब कमरो का पलटवार: “चश्मे की जरूरत मंत्री जी को, जनता सब देख रही है”
स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर तत्काल पलटवार करते हुए पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने सीधे लहजे में कहा, “स्वास्थ्य मंत्री जी, चश्मे की जरूरत आपको है, मुझे या क्षेत्र की जनता को नहीं।”
कमरो ने कहा कि यदि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए MCB जिले का गठन न किया होता, तो आज भाजपा सरकार और उनके मंत्री को इस संयुक्त कलेक्टर कार्यालय के भूमिपूजन का श्रेय लेने का अवसर ही प्राप्त नहीं होता। उन्होंने भाजपा के पिछले 15 वर्षों के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब प्रदेश में लंबे समय तक भाजपा की सरकार थी और स्वयं मंत्री जी विधायक थे, तब जिले का निर्माण क्यों नहीं कराया गया? उस समय भूमिपूजन क्यों नहीं हुआ?
वनांचल आदिवासियों के स्वाभिमान और श्रेय की राजनीति पर घमासान
मंत्री जायसवाल के “5 किलोमीटर और आगे जाने” वाले बयान को गुलाब कमरो ने संवेदनहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों से आने वाले गरीब, साधन-विहीन और आदिवासी ग्रामीणों के संघर्ष का मजाक उड़ाना एक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी है। मंत्री पद की गरिमा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों को समझे बिना ऐसे बयान देना वनांचल की जनता की भावनाओं को आहत करने जैसा है।
सड़क निर्माण के दावों पर कमरो ने स्पष्ट किया कि जिन सड़कों को भाजपा अपनी उपलब्धि बता रही है, वे केवल राज्य सरकार के प्रयासों का नतीजा नहीं हैं। इनमें क्षेत्र की सांसद और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का निरंतर प्रयास और केंद्रीय/क्षेत्रीय निधियों का योगदान शामिल है।
उन्होंने अंत में कहा कि MCB की जनता भली-भांति जानती है कि जिले की सौगात कांग्रेस सरकार ने दी, सड़कों की स्वीकृति सांसद के प्रयासों से मिली और अब निर्माण पूरा होने के समय भाजपा केवल श्रेय लेने की होड़ में मैदान में कूद पड़ी है। विकास कार्यों का विरोध कोई नहीं कर रहा, लेकिन विकास के नाम पर पारदर्शिता, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और वनांचल वासियों के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।