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गरियाबंद में कानून नहीं, अफसरों की मर्जी चलती है! ओपेरा की आड़ में अश्लीलता का महोत्सव, एसडीएम की मौजूदगी में उड़ाया गया पैसा वीडियो बनाकर लिया आनंद

 

गरियाबंद में कानून नहीं, अफसरों की मर्जी चलती है!
ओपेरा की आड़ में अश्लीलता का महोत्सव, एसडीएम की मौजूदगी में उड़ाया गया पैसा
वीडियो बनाकर लिया आनं

चार आयोजकों पर मामला, दो सिपाही लाइन अटैच —
लेकिन अनुमति देने वाला और मौके पर मौजूद एसडीएम पूरी तरह सुरक्षित

अब नहीं हुई कार्रवाई तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और आईजी से होगी सीधी शिकायत

छत्तीसगढ़ _गरियाबंद-:देवभोग थाना क्षेत्र में ओपेरा के नाम पर आयोजित अश्लील डांस कार्यक्रम अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक संरक्षण, नैतिक पतन और कानून की खुलेआम अवहेलना का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। जिस कार्यक्रम ने पूरे जिले को शर्मसार किया, वह मैनपुर एसडीएम की अनुमति से आयोजित हुआ और सबसे गंभीर आरोप यह है कि अश्लील नृत्य के दौरान एसडीएम स्वयं मौके पर मौजूद रहे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि मंच पर अश्लील डांस चल रहा है, दर्शक खुलेआम “चांस मारते” नजर आ रहे हैं, नोट उड़ाए जा रहे हैं और आरोप है कि एसडीएम स्वयं मोबाइल से वीडियो बनाकर इस तमाशे का आनंद लेते रहे। यही नहीं, एसडीएम के करीबी और सहयोगी बताए जा रहे लोग मंच के सामने पैसे लुटाते हुए देखे जा सकते हैं।

अश्लीलता चलती रही, जिम्मेदार अफसर बने मूकदर्शक

कानून स्पष्ट है—सार्वजनिक स्थल पर अश्लील नृत्य प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कार्यक्रम न केवल आयोजित हुआ, बल्कि पूरी रात चलता रहा। सवाल यह है कि:
क्या प्रशासनिक अधिकारी कानून से ऊपर हैं?

*यदि एसडीएम ही नियमों की अनदेखी करेंगे, तो आम जनता से क्या अपेक्षा की जाए*

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आयोजन बंद क्यों नहीं कराया?
वीडियो वायरल होने पर दिखावटी कार्रवाई
जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, तब पुलिस प्रशासन हरकत में आया।

देवभोग पुलिस ने चार आयोजकों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया, आयोजन को एक दिन पहले ही बंद करवा कर टेंट हटवाया गया।

दबाव बढ़ने पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर अब तक कोई आंच नहीं आई।

एसडीएम पर कार्रवाई शून्य, जिला प्रशासन रहस्यमय चुप्पी में
जिस अधिकारी की अनुमति से यह पूरा आयोजन हुआ और जिसकी मौजूदगी में अश्लील डांस चलता रहा, उस एसडीएम पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिला प्रशासन की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है।

क्या यह मामला दबाने की कोशिश हो रही है?

*क्या कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित रखी जाएगी?*

*अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान*

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने साफ ऐलान किया है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तो इसकी सीधी शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की जाएगी।

साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को भी लिखित शिकायत सौंपी जाएगी।
जनता का सीधा सवाल: कानून सबके लिए या सिर्फ कमजोरों के लिए?

यह मामला अब एक आयोजन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, नैतिकता और कानून के समान पालन का इम्तिहान बन चुका है।

अब निगाहें टिकी हैं—
क्या जिला प्रशासन साहस दिखाकर जिम्मेदार अफसर पर कार्रवाई करेगा?

या फिर मामला मुख्यमंत्री और आईजी के दरवाजे तक पहुंचने के बाद ही सिस्टम जागेगा?
देवभोग की यह घटना पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है—
अगर आज सवाल नहीं उठे, तो कल ऐसी अश्लीलता को ही “सरकारी अनुमति” का नाम दे दिया जाएगा।

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