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29 करोड़ साल पुराने इतिहास का गवाह: गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क बना छत्तीसगढ़ का नया गौरव

29 करोड़ साल पुराने इतिहास का गवाह: गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क बना छत्तीसगढ़ का नया गौर

 

छत्तीसगढ़ का गौरव “गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क” राष्ट्रीय पटल पर छा रहा है, जहाँ 29 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्मों का रहस्य पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। महज चार महीनों में 8,000 से अधिक पर्यटक इस अद्वितीय स्थल का भ्रमण कर चुके हैं, जो इसे एक प्रमुख पर्यटन और शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़ – कभी गुमनाम और अनदेखा रहा मनेंद्रगढ़ का यह इलाका अब एक जीवंत पर्यटन स्थल बन चुका है। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क में पाए जाने वाले 29 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्मों ने इसे एक वैश्विक पहचान दिलाई है। वन विभाग के डीएफओ मनीष कश्यप (आईएफएस) के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल ने न केवल इस क्षेत्र को एक आधुनिक पर्यटन केंद्र में बदल दिया है, बल्कि इसे पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बना दिया है।

विज्ञान और कला का अद्भुत संगम: देश का पहला मरीन फॉसिल रॉक गार्डन

पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण हसदेव नदी के किनारे बना देश का पहला मरीन फॉसिल आधारित रॉक गार्डन है। हार्ड ग्रेनाइट चट्टानों को तराशकर बनाए गए 35 प्राचीन जीवों की कलाकृतियाँ यहाँ आने वाले हर पर्यटक को धरती के प्रारंभिक युग में वापस ले जाती हैं। ये कलाकृतियाँ जमीन, पानी और एम्फीबियन जीवों के विकास की कहानी सुनाती हैं, जो इसे कला और विज्ञान का एक अनूठा संगम बनाता है।

इंटरप्रिटेशन सेंटर से जीवंत होता इतिहास

पर्यटकों को जीवाश्मों के रहस्य और उनकी निर्माण प्रक्रिया को समझाने के लिए एक अत्याधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाया गया है। यहाँ पेंटिंग्स, वीडियो डिस्प्ले और वास्तविक जीवाश्मों के माध्यम से लाखों वर्षों के इतिहास को जीवंत किया गया है। यह सेंटर स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक स्थल बन गया है, जहाँ वे किताबों के बाहर प्रकृति के इतिहास को देख और समझ सकते हैं।

साहसिक पर्यटन और प्रकृति का मेल

फॉसिल पार्क सिर्फ जीवाश्मों तक ही सीमित नहीं है। यहाँ बांस से बना बम्बू सेटम, कैक्टस गार्डन और नेचर ट्रेल जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जो प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती हैं। हसदेव नदी में बोटिंग और बम्बू राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ भी उपलब्ध हैं, जो इस पार्क को एक संपूर्ण पर्यटन पैकेज बनाती हैं (वर्तमान में बरसात के कारण ये सेवाएं अस्थायी रूप से बंद हैं)।

डिजिटल मार्केटिंग से मिला राष्ट्रीय पहचान

इस परियोजना की सफलता में डीएफओ मनीष कश्यप की आधुनिक सोच का भी बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग पर जोर दिया, जहाँ यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और न्यूज़ पोर्टल्स के माध्यम से पार्क की जानकारी लाखों लोगों तक पहुँचाई गई। साथ ही, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर साइनबोर्ड लगाकर व्यापक जागरूकता फैलाई गई।

स्थानीय विकास और रोज़गार की नई उम्मीद

स्थानीय विधायक और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सहयोग से इस परियोजना को गति मिली है। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क अब स्थानीय समुदाय के लिए रोज़गार और विकास का एक नया केंद्र बन रहा है। सर्दियों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के लिए एक मिसाल बन चुका है कि कैसे प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तरीकों से संरक्षित कर शिक्षा, पर्यटन और स्थानीय विकास को एक साथ बढ़ावा दिया जा सकता है। यह पहल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकती है।

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