चिरमिरी में वन विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक; अवैध सेमर लकड़ी से लदा उत्तर प्रदेश का ट्रक ज़ब्त, अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह में हड़कंप
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के चिरमिरी वन परिक्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जंगलों की सुरक्षा और अवैध उत्खनन व कटाई पर रोक लगाने के दावों के बीच वन विभाग ने लकड़ी तस्करों के खिलाफ एक बड़ी और कामयाब कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की मुस्तैद टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर चिरमिरी रेंज के अंतर्गत आने वाले दुबछोला गांव में घेराबंदी कर सेमर प्रजाति की बेशकीमती लकड़ियों से आकंठ भरे एक बड़े ट्रक को ज़ब्त किया है।
पकड़े गए वाहन का पंजीयन क्रमांक UP-64 H-9748 बताया जा रहा है, जिससे इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों को खोखला कर लकड़ियों की खेप उत्तर प्रदेश भेजने की तैयारी थी।
डीएफओ के कड़े तेवर: तड़के दी गई दबिश
पिछले कुछ समय से जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों से पेड़ कटाई और रात के अंधेरे में लकड़ियों के अवैध परिवहन की शिकायतें आला अधिकारियों तक पहुंच रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मनेंद्रगढ़ डीएफओ (DFO) चंद्र अग्रवाल ने सभी रेंजरों और गश्ती दलों को हाई अलर्ट पर रहने तथा तस्करों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के कड़े निर्देश जारी किए थे।
इसी तारतम्य में चिरमिरी रेंजर टीकम सिंह ठाकुर के नेतृत्व में वन विभाग की एक विशेष टीम दुबछोला और आसपास के इलाकों में तड़के गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से पुख्ता इनपुट मिला कि तस्कर एक ट्रक में भारी मात्रा में सेमर की गीली लकड़ी लोड कर उसे निकालने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही वन अमले ने तत्काल नाकाबंदी की और संदेहास्पद ट्रक को धर दबोचा।
जांच में खुली पोल: दस्तावेज़ों के नाम पर चालक के उड़े होश
वन विभाग की टीम ने जब ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली, तो तिरपाल के नीचे भारी मात्रा में सेमर प्रजाति के मोटे लट्ठे (लकड़ियां) भरे हुए पाए गए। वन कर्मियों द्वारा वाहन चालक से लकड़ी की खरीदी, उसके स्रोत (Origin) और परिवहन से संबंधित अनिवार्य दस्तावेज़ जैसे टीपी (ट्रांजिट पास) और वैध कागजात की मांग की गई।
दस्तावेज़ मांगते ही चालक के होश उड़ गए और वह टीम के सामने बहानेबाजी करने लगा। परिवहन से जुड़ा कोई भी वैध कागज़ात प्रस्तुत नहीं किए जाने पर वन विभाग ने बिना किसी ढिलाई के पूरे माल समेत ट्रक को अपने कब्ज़े में ले लिया।
अंतरराज्यीय तस्कर नेटवर्क के जुड़े हैं तार!
स्थानीय जानकारों और विभागीय सूत्रों की मानें तो एमसीबी जिले के जंगलों से कीमती और प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ियों को काटकर पड़ोसी राज्यों—विशेषकर उत्तर प्रदेश (UP) और मध्य प्रदेश (MP) की लकड़ी मंडियों और आरा मिलों में खपाने का एक संगठित और बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
तस्करी का तरीका: तस्कर आमतौर पर रात के सन्नाटे या अलसुबह के वक्त का फायदा उठाते हैं ताकि वन विभाग की चेकपोस्ट और नजरों से बचा जा सके। चिरमिरी में हुई इस ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन विभाग की मुस्तैदी से इस बार एक बड़ी खेप छत्तीसगढ़ से बाहर जाने से रोक ली गई।
भारतीय वन अधिनियम के तहत केस दर्ज, मास्टरमाइंड की तलाश शुरू
वन विभाग ने ज़ब्त ट्रक और अवैध सेमर की लकड़ी को चिरमिरी डिपो में सुरक्षित खड़ा करवा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब वन विभाग का खोजी दस्ता इस बात की बारीकी से तफ्तीश कर रहा है कि:
- यह लकड़ी चिरमिरी रेंज के किस विशिष्ट बीट या जंगल से काटी गई थी?
- इस अवैध कटाई और लोडिंग में स्थानीय स्तर पर कौन-कौन से तस्कर और बिचौलिए शामिल हैं?
- उत्तर प्रदेश के इस ट्रक को छत्तीसगढ़ में किस सफेदपोश या बड़े तस्कर ने हायर किया था?
आधिकारिक पक्ष
”हमारी टीम सुबह के वक्त रूटीन गश्त पर थी, तभी मुखबिर की सूचना पर दुबछोला क्षेत्र में नाकाबंदी कर सेमर प्रजाति की लकड़ी से भरे एक संदिग्ध ट्रक को रोका गया। चालक से जब लकड़ी के परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज़ और टीपी मांगी गई, तो वह कोई भी वैध कागज़ात पेश नहीं कर सका। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत ट्रक और अवैध लकड़ी को ज़ब्त कर राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वनों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— टीकम सिंह ठाकुर, रेंजर (चिरमिरी वन परिक्षेत्र)