एमसीबी में मकान टैक्स पर घमासान: भरतपुर के बाद अब मनेन्द्रगढ़ के लोहारी में विरोध की आग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रशासनिक रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा— “महंगाई और बढ़े बिजली बिल से कमर टूटी, अब नया टैक्स बर्दाश्त नहीं”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने संभाला मोर्चा, बोले— “गरीब किसान-मज़दूरों की जेब पर डाका डाल रही सरकार”
| मनेन्द्रगढ़/भरतपुर (एमसीबी)
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के ग्रामीण अंचलों में पंचायत स्तर पर मकान एवं संपत्ति कर (House/Property Tax) वसूलने का फैसला अब बड़े जन-आक्रोश का रूप लेता जा रहा है। हाल ही में जनपद पंचायत क्षेत्र भरतपुर में कर वसूली को लेकर हुए भारी बवाल के बाद, अब यह विवाद जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के ग्राम पंचायत लोहारी में भी पूरी तरह भड़क चुका है। पंचायत प्रशासन द्वारा संपत्ति कर वसूली का फरमान जारी होते ही लोहारी के ग्रामीणों ने गोलबंद होकर इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
भरतपुर में बैकफुट पर आया था प्रशासन, लोहारी में फिर वही कवायद
उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिनों पूर्व जिले के भरतपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में भी पंचायत विभाग की ओर से ग्रामीणों पर संपत्ति कर थोपने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उस दौरान भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद जनपद पंचायत भरतपुर को बैकफुट पर आते हुए कर वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगानी पड़ी थी।
लेकिन, भरतपुर में रोक लगने के तुरंत बाद मनेन्द्रगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत लोहारी में कर वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे ग्रामीणों में यह संदेश गया है कि प्रशासन एक जगह विरोध दबने पर दूसरी जगह चुपचाप वसूली लागू करने की कोशिश कर रहा है, जिससे लोहारी के ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।
महंगाई के दौर में ग्रामीणों की दोटूक: “हमारे पास खाने को पैसे नहीं, टैक्स कहाँ से दें?”
लोहारी ग्राम पंचायत में वसूली अमले के पहुंचते ही ग्रामीणों ने एक स्वर में पंचायत प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से ही बदहाली के दौर से गुज़र रही है।
ग्रामीणों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा:
“गाँव में रहने वाली बहुसंख्यक आबादी छोटे किसानों, भूमिहीन मज़दूरों और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) राशन कार्डधारियों की है। बीते कुछ महीनों में बिजली के बिल दो से तीन गुना तक बढ़कर आ रहे हैं। खेती की लागत बढ़ गई है और राशन-सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे संकट के समय में छत पर टैक्स लगाना पूरी तरह से अमानवीय है। हम किसी भी सूरत में यह प्रस्तावित कर नहीं चुकाएंगे।”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो का हमला: “कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर”
ग्रामीणों के इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक गुलाब कमरो का पुरजोर समर्थन मिला है। भरतपुर में कर वसूली पर रोक लगवाने के बाद अब वे लोहारी के ग्रामीणों के हक में भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार और जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
- गरीबों पर आर्थिक अत्याचार: “प्रदेश की भाजपा सरकार एक तरफ तो ग्रामीण विकास और किसान-मजदूरों की भलाई के बड़े-बड़े ढिंढोरे पीटती है, वहीं दूसरी तरफ गाँव के गरीब आदिवासियों, किसानों और राशन कार्डधारियों की जेब खाली करने की योजनाएं बना रही है।”
- जनविरोधी रवैया: “गाँव के लोग पहले से ही महंगाई और अत्यधिक बिजली बिलों की मार झेल रहे हैं। ऐसे में मकान टैक्स का नया बोझ लादना सरकार के जनविरोधी और संवेदनहीन रवैये को उजागर करता है।”
- सड़क से सदन तक लड़ाई: “हम ग्रामीणों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। यदि प्रशासन ने लोहारी में इस अवैध और जनविरोधी कर वसूली को तुरंत वापस नहीं लिया, तो पूरे जिले में उग्र जन-आंदोलन किया जाएगा।”
प्रशासनिक दुविधा और संभावित राजनीतिक गर्माहट
लोहारी में उपजे इस जन-आक्रोश के बाद अब जिला प्रशासन और जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ पर चौतरफा दबाव बन गया है। एक तरफ जहाँ पंचायत कोष बढ़ाने के नाम पर कर लगाने की नीति तैयार की गई थी, वहीं दूसरी तरफ ज़मीनी स्तर पर हो रहे कड़े राजनीतिक और सामाजिक विरोध ने अधिकारियों के हाथ-पाँव फुला दिए हैं।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस कर वसूली पर स्थायी रोक नहीं लगाई, तो यह मुद्दा पूरे एमसीबी जिले के अन्य ग्राम पंचायतों में भी आग की तरह फैल सकता है।
आगे क्या? ग्रामीणों ने दी चक्काजाम की चेतावनी
लोहारी के ग्राम प्रमुखों और युवाओं ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि दो दिनों के भीतर पंचायत एवं जनपद प्रशासन द्वारा संपत्ति कर संबंधी सूचना/आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो वे जनपद मुख्यालय का घेराव करेंगे और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।